इटावा में छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य का जलवा, राष्ट्रीय दिव्यांग फैशन एंड टैलेंट शो में मिला द्वितीय स्थान

उत्तर प्रदेश के इटावा में आयोजित राष्ट्रीय दिव्यांग फैशन एंड टैलेंट शो में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पंथी नृत्य दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल किया। देशभर से पहुंचे दिव्यांग प्रतिभागियों के बीच छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने अपनी लोकसंस्कृति, आकर्षक तालमेल और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है। मुंगेली सहित पूरे प्रदेश में इस सफलता को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल है।

Nov 2, 2026 - 12:46
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इटावा में छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य का जलवा, राष्ट्रीय दिव्यांग फैशन एंड टैलेंट शो में मिला द्वितीय स्थान

UNITED NEWS OF ASIA. राकेश भास्कर, मुंगेली l छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश के इटावा में आयोजित राष्ट्रीय दिव्यांग फैशन एंड टैलेंट शो में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पंथी नृत्य दल ने शानदार प्रस्तुति देते हुए ऑल इंडिया स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि से प्रदेश का गौरव बढ़ा है। प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे दिव्यांग प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा, कला और हुनर का प्रदर्शन किया। ऐसे राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत का परिचय देते हुए पंथी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी और निर्णायकों एवं दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

इटावा में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतर मंच उपलब्ध कराना था। इसमें फैशन, कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने राज्य के प्रसिद्ध लोकनृत्य पंथी को अपनी प्रस्तुति का हिस्सा बनाया। पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विशेष रूप से गुरु घासीदास बाबा के संदेशों और सतनाम पंथ की परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

प्रतियोगिता के दौरान कलाकारों ने आकर्षक तालमेल, शानदार लय और उत्साह के साथ पंथी नृत्य प्रस्तुत किया। पारंपरिक लोकधुनों और नृत्य की विशेष शैली ने कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति में आत्मविश्वास और मेहनत साफ नजर आई। उनकी सामूहिक प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि कला और प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती। यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और कुछ कर दिखाने का जज्बा हो, तो वह किसी भी मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।

राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त करना छत्तीसगढ़ के कलाकारों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस सफलता से प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ा है और उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली है। साथ ही छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पंथी नृत्य को देश के अन्य राज्यों के लोगों के बीच पहचान दिलाने का अवसर भी मिला है। लोककला के माध्यम से कलाकारों ने प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया।

इस उपलब्धि को लेकर छत्तीसगढ़ के कला प्रेमियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है। कलाकारों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की जा रही है। यह सफलता उन सभी दिव्यांग प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो अपनी कला और हुनर के माध्यम से समाज में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं।

इटावा में मिली यह सफलता केवल एक प्रतियोगिता में स्थान हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और दिव्यांग कलाकारों की प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी है। पंथी नृत्य की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि हौसले मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।