छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से 3358 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी की मांग, कांग्रेस ने दी किसान आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से 1 नवंबर 2026 से 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी शुरू करने की मांग की है। कांग्रेस ने बारदाने, सोसायटियों की तैयारी, परिवहन, टोकन, भुगतान और रकबा समर्पण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते हुए किसानों का बकाया भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की। पार्टी ने मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशभर में किसान आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

Oct 10, 2026 - 15:01
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छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से 3358 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी की मांग, कांग्रेस ने दी किसान आंदोलन की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख और किसानों को मिलने वाली कीमत को लेकर सियासत तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार से 1 नवंबर 2026 से धान खरीदी शुरू करने और किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि खरीफ की फसल तैयार होने के बावजूद धान खरीदी की तैयारियां जमीन पर नजर नहीं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की सुविधा के लिए समय रहते ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।

3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की मांग
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि धान खरीदी के लिए बारदानों की व्यवस्था, सहकारी समितियों को फंड, भुगतान के लिए बजट और परिवहन की प्रक्रिया जैसी तैयारियां स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे। इसमें किसानों के रकबे का सत्यापन, गिरदावली, पंजीयन, टोकन वितरण, धान की तौल और भुगतान की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान देने की मांग कर रही है। उनका तर्क है कि वर्ष 2023 में 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया गया था और पिछले ढाई वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में कुल 258 रुपये की वृद्धि की है। कांग्रेस के अनुसार, इन दोनों राशियों को जोड़ने पर 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर बनती है।

1700 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर सवाल
सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि खरीफ सीजन 2022-23 की चौथी किस्त के 1700 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने दावा किया कि भुगतान में देरी से किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने सरकार से बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग की है। हालांकि, यह राशि और भुगतान संबंधी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।

रकबा समर्पण को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता
कांग्रेस ने किसानों के पंजीकृत रकबे में कथित कटौती और जबरिया रकबा समर्पण के मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। सुरेंद्र वर्मा का आरोप है कि सर्वे के नाम पर किसानों की पंजीकृत भूमि घटाने से उनकी धान बिक्री प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया अपनाने और किसानों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर देने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू की जा सकती थी, इसलिए मौजूदा सरकार को भी समय पर व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। कांग्रेस ने किसानों से जुड़े वादों को पूरा करने और खरीदी प्रक्रिया में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं करने की मांग की।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी में देरी, भुगतान संबंधी समस्याओं और किसानों के रकबे को लेकर उठाए गए मुद्दों का समाधान नहीं होने पर पार्टी प्रदेश के प्रत्येक जिले में आंदोलन करेगी। कांग्रेस ने सरकार से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने, बकाया भुगतान जारी करने और धान खरीदी से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।