छत्तीसगढ़ AI मिशन पर कांग्रेस का सवाल, कहा- युवाओं को प्रमाण पत्र नहीं रोजगार का ठोस रोडमैप चाहिए
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन और AI मिशन को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने लगभग 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित खर्च, 6 लाख विद्यार्थियों को AI प्रशिक्षण और 300 से अधिक AI स्टार्टअप को सहायता देने के दावों पर सवाल उठाते हुए रोजगार सृजन का स्पष्ट लक्ष्य, बजट का विवरण और सार्वजनिक ऑडिट जारी करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन और AI मिशन को लेकर सियासत तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को नए सपने दिखाने के बजाय रोजगार उपलब्ध कराने का ठोस रोडमैप पेश किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार AI मिशन के नाम पर युवाओं को फिर से उम्मीदें दे रही है, जबकि वास्तविक रोजगार के अवसरों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
500 करोड़ रुपये के मिशन पर कांग्रेस के सवाल
वंदना राजपूत के अनुसार, सरकार आने वाले पांच वर्षों में कौशल विकास के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिशन के तहत लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। सरकार के दावे के मुताबिक, AI मिशन के अंतर्गत 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा 300 से अधिक AI स्टार्टअप को सहायता देने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इतने बड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद कितने युवाओं को वास्तविक रोजगार मिलेगा और कितने नए स्टार्टअप जमीन पर उतर पाएंगे। पार्टी ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि कुल बजट में से युवाओं के कौशल विकास और रोजगार उपलब्ध कराने पर कितनी राशि सीधे खर्च की जाएगी।
खाली पदों और सरकारी नौकरी के वादे पर निशाना
वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस के मुताबिक पिछले लगभग पौने तीन वर्षों में भर्ती के पर्याप्त अवसर सामने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रोफेसर और शिक्षकों के पद खाली हैं तथा विभिन्न विभागों में लगभग 1 लाख 7 हजार पद रिक्त होने का दावा किया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि युवाओं को केवल प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशिक्षण के बाद नौकरी या स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने सरकार की पांच वर्षीय कार्ययोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा कार्यकाल में बचे समय को देखते हुए योजनाओं की समयसीमा और परिणामों को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।
रोजगार लक्ष्य और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि AI मिशन के तहत कितनी नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। छह लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के बाद कितने युवाओं को प्रमाणित रोजगार मिलेगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई है? पार्टी ने AI स्टार्टअप के चयन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण संस्थानों की सूची भी सार्वजनिक करने की मांग की।
वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार को मिशन का पूरा बजट, समयसीमा, प्रशिक्षण प्रक्रिया और हर वर्ष की उपलब्धियों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि योजना के खर्च और परिणामों का नियमित ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी राशि का उपयोग युवाओं के हित में किस तरह किया जा रहा है।
तकनीक का विरोध नहीं, रोजगार की गारंटी चाहिए
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसी नई तकनीकों के विरोध में नहीं है। पार्टी चाहती है कि छत्तीसगढ़ के युवा इन क्षेत्रों में आगे बढ़ें और उन्हें बेहतर अवसर मिलें। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि तकनीकी प्रशिक्षण के साथ रोजगार और स्वरोजगार का स्पष्ट लक्ष्य भी तय होना चाहिए।
वंदना राजपूत ने कहा कि युवाओं को प्रचार और घोषणाओं के बजाय नौकरी, अवसर और परिणाम चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से AI मिशन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की है। फिलहाल, रोजगार के निर्धारित लक्ष्य और मिशन के विस्तृत बजट संबंधी सवालों पर सरकार का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।