मल्हारगढ़ में पटवारियों की कलमबंद हड़ताल जारी, स्वामित्व योजना में विक्रेता की भूमिका का विरोध
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश संगठन के आह्वान पर 8 अक्टूबर 2026 से पटवारियों की कलमबंद हड़ताल जारी है। स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को निष्पादक (विक्रेता) बनाए जाने के विरोध में मल्हारगढ़ तहसीलदार पंकज जाट को ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और निलंबन व सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई वापस लेने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेश मरेठा, मल्हारगढ़/मंदसौर। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ में स्वामित्व योजना के अंतर्गत पटवारियों को निष्पादक (विक्रेता) बनाए जाने के विरोध में पटवारी संघ की कलमबंद हड़ताल जारी है। प्रदेश संगठन के आह्वान पर 8 अक्टूबर 2026 से शुरू हुई इस हड़ताल के तहत पटवारी अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं। इसी क्रम में पटवारी संघ ने मल्हारगढ़ तहसीलदार पंकज जाट को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियों से अवगत कराया और समस्या के समाधान की मांग की।
स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका पर आपत्ति
पटवारी संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि पर बने मकानों के अधिकार अभिलेख पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। संबंधित लोगों को भूमि स्वामी अधिकार भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हीं व्यक्तियों के नाम दोबारा निःशुल्क रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक यानी विक्रेता की भूमिका सौंपे जाने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन को इसी प्रक्रिया पर आपत्ति है। संघ का मानना है कि इस भूमिका के कारण पटवारियों के सामने कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
पटवारी संघ ने मांग की है कि स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को निष्पादक की भूमिका से अलग रखा जाए। साथ ही, इस कार्य में उनकी जिम्मेदारियों, अधिकारों और कानूनी स्थिति को लेकर शासन की ओर से स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति उत्पन्न न हो। संगठन का कहना है कि नियमों और जिम्मेदारियों की स्पष्टता के बिना इस तरह की भूमिका सौंपना उचित नहीं है।
पहले भी सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन
संघ के अनुसार, इस विषय को लेकर पहले भी कई बार शासन स्तर पर ज्ञापन के माध्यम से समस्याएं रखी जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक अपेक्षित सुधार नहीं होने से पटवारियों में नाराजगी बनी हुई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय पटवारियों पर दबाव बनाकर काम करवाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप पटवारी संघ की ओर से लगाए गए हैं।
निलंबन और सेवा समाप्ति की कार्रवाई वापस लेने की मांग
पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका विरोध स्वामित्व योजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि योजना के अंतर्गत पटवारियों को निष्पादक (विक्रेता) की भूमिका सौंपे जाने और उससे जुड़ी संभावित कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर है। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने इस कार्य को लेकर पटवारियों पर की गई निलंबन, सेवा समाप्ति सहित अन्य कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठाई है।
प्रशासन के निर्णय पर टिकी नजरें
8 अक्टूबर से जारी कलमबंद हड़ताल के बाद अब पटवारी संघ और प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। संगठन चाहता है कि उसकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए और पटवारियों की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और हड़ताल समाप्त कराने के लिए कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।