छत्तीसगढ़ में देश का पहला राज्य स्तरीय AI Conclave, शिक्षा सुधार के लिए तैयार होगा AI रोडमैप

छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के समग्र विकास के उद्देश्य से राज्य स्तरीय AI Conclave का आयोजन किया गया। रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कॉन्क्लेव में शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए विकसित ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप का विमोचन किया। कार्यक्रम में देश-विदेश के तकनीकी संस्थानों और कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कॉन्क्लेव से मिले सुझावों और तकनीकी समाधानों के आधार पर शिक्षा विभाग के लिए व्यापक AI रोडमैप तैयार किया जाएगा।

Sep 18, 2026 - 08:52
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छत्तीसगढ़ में देश का पहला राज्य स्तरीय AI Conclave, शिक्षा सुधार के लिए तैयार होगा AI रोडमैप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में विद्यालयीन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के समग्र विकास के उद्देश्य से राज्य स्तरीय AI Conclave का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समग्र शिक्षा के अंतर्गत 17 सितंबर 2026 को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस कॉन्क्लेव में शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सार्थक और प्रभावी उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। विभाग की ओर से इसे विद्यालयीन शिक्षा के स्तर पर AI के उपयोग की दिशा में देश का पहला राज्य स्तरीय आयोजन बताया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव रहे। उन्होंने शाला त्यागी यानी ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप का आधिकारिक विमोचन किया। कार्यक्रम में उन्होंने विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस की भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव के दौरान सामने आए निष्कर्ष शिक्षकों के लिए सहायक संसाधन तैयार करने में उपयोगी होंगे और विद्यार्थियों के कौशल विकास को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलजीत सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर बात रखी। उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में AI का उपयोग विभिन्न स्तरों पर हो रहा है। उनके अनुसार, स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में काम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI का उद्देश्य शिक्षकों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उन्हें उनके कार्य में सहायता प्रदान करना है।

समग्र शिक्षा की आयुक्त डॉ. किरण कौशल ने स्वागत उद्बोधन में AI आधारित तकनीकों के माध्यम से स्मार्ट क्लास और ICT लैब के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से शिक्षा को सरल और सुगम बनाने तथा उसे अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

कॉन्क्लेव में देश और दुनिया के कई प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों और कंपनियों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में गूगल, वाधवानी एआई, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, खान एकेडमी और फिजिक्स वाला सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा आईआईटी भिलाई, आईआईएम रायपुर, एनआईटी रायपुर और चिप्स सहित तकनीकी एवं शैक्षणिक संस्थानों की भी सहभागिता रही।

कॉन्क्लेव के दौरान शिक्षा व्यवस्था में AI के संभावित उपयोग, शिक्षकों के लिए सहायक तकनीकी संसाधनों, स्मार्ट क्लास और ICT लैब के प्रभावी इस्तेमाल तथा विद्यार्थियों के कौशल विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य उपलब्ध तकनीकी समाधानों और नवाचारों को शिक्षा व्यवस्था की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप उपयोग में लाने की संभावनाओं को समझना रहा।

कार्यक्रम के समापन पर कॉन्क्लेव में सामने आए नवाचारों, विचारों और तकनीकी समाधानों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के लिए व्यापक AI रोडमैप तैयार करने की बात कही गई। यह रोडमैप शिक्षकों के लिए सहायक संसाधन विकसित करने और शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में आधार तैयार करेगा। विभाग के अनुसार, AI के उपयोग को शिक्षा की जरूरतों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी व्यवस्था विकसित करने पर आगे काम किया जाएगा।