बेलरबहारा उप स्वास्थ्य केंद्र बना शोपीस, लटका रहता है ताला, इलाज के लिए ब्लॉक मुख्यालय पहुंच रहे ग्रामीण
नगरी ब्लॉक के ग्राम बेलरबहारा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से ग्रामीण परेशान हैं। केंद्र में ताला लटका रहने के कारण आसपास के करीब 10 गांवों के ग्रामीणों को सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी-दस्त जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी ब्लॉक मुख्यालय जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल व्यवस्था सुधारने और स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l ब्लॉक मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बेलरबहारा में संचालित उप स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमित रूप से स्वास्थ्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं रहते और केंद्र में ताला लटका रहता है। इसके चलते आसपास के करीब 10 गांवों के ग्रामीणों को सामान्य मौसमी बीमारियों के इलाज के लिए भी ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
बताया गया कि ग्राम पंचायत बेलरबहारा में दो ग्राम पंचायत क्षेत्रों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा मिलनी है। लेकिन केंद्र में स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं मिलने और ताला लगे रहने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी-दस्त जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को नगरी या अन्य स्थानों तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नाव के सहारे पंचायत मुख्यालय पहुंचते हैं ग्रामीण
ग्रामीण रामसिंग यादव, टिकेश्वर कुलदीप, खामसिंग माझी, बोधन नागेश और परस ध्रुव ने बताया कि ग्राम पंचायत बेलरबहारा के आश्रित ग्राम बरपदर में आवागमन की सुविधा बेहद कठिन है। यह क्षेत्र सोंढूर डैम के डूब क्षेत्र से प्रभावित है और कई स्थानों पर जंगल के रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीण राशन और जरूरी सामान लेने के साथ छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए नाव के सहारे पंचायत मुख्यालय पहुंचते हैं। यहां उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लगा मिलने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। कई बार मजबूरी में गरियाबंद जिले के मैनपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है।
जंगली क्षेत्र में वन्यजीव और जहरीले सर्प का खतरा
ग्रामीण कल्याण सिंग ध्रुवा, ब्रम्हदेव शाडिल, देव कुमार और नंदलाल ने बताया कि क्षेत्र टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है। यहां बड़ी संख्या में वन्यजीव मौजूद हैं और मानव-वन्यजीव द्वंद्व की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। सोंढूर डैम और जंगल क्षेत्र होने के कारण जहरीले सांप तथा अन्य कीड़े-मकौड़ों का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए नजदीक में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों ने की स्वास्थ्य सुविधा बहाल करने की मांग
बेलरबहारा के सरपंच नरेश माझी ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटका रहता है। उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि यहां किस नर्स की पदस्थापना है। कभी-कभार कोई नर्स टीकाकरण के लिए गांव में दिखाई देती है तो पता चलता है कि वह किसी अन्य व्यवस्था के तहत आई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
जनपद सदस्य श्रीधन सोम ने बताया कि ग्राम पंचायत ठेन्ही के छह आश्रित ग्राम घने जंगलों में बसे हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य कर्मी नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। उन्होंने केंद्र में तत्काल कर्मचारियों की नियुक्ति कर नियमित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कुमार यादव ने बताया कि हाल ही में चार भालुओं ने दो युवकों पर हमला किया था। ऐसे क्षेत्रों में तत्काल प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उप स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनकर रह गया है और यहां स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति कर स्वास्थ्य सुविधा बहाल की जानी चाहिए।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने सिविल अस्पताल नगरी के बीएमओ से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।