महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सेवा का संकल्प, दीपावली पर जरूरतमंदों को बांटे जाएंगे मिष्ठान्न और वस्त्र
भिलाई में अध्यात्म पथ सेवा परिवार, छत्तीसगढ़ की बैठक में दीपावली पर जरूरतमंद परिवारों को मिष्ठान्न और वस्त्र वितरित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में हेमा सक्सेना को अध्यक्ष, नमित क्षत्रिय को महासचिव, वंदना सिंह को उपाध्यक्ष और हर्षा ताम्रकार को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया। संगठन नवंबर में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, भिलाई। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर अध्यात्म पथ सेवा परिवार, छत्तीसगढ़ ने समाजसेवा और परोपकार का संकल्प लिया। भिलाई के नुक्कड़ में आयोजित बैठक में दीपावली पर जरूरतमंद परिवारों को मिष्ठान्न एवं वस्त्र वितरित करने सहित विभिन्न जनसेवा गतिविधियों की कार्ययोजना तैयार की गई। बैठक में सदस्यों ने महर्षि वाल्मीकि के प्रेरणादायी जीवन का स्मरण करते हुए समाज के जरूरतमंद लोगों तक सहयोग पहुंचाने और तन, मन तथा धन से समाज कल्याण के कार्यों में सहभागी बनने का संकल्प लिया। बैठक की अध्यक्षता आचार्य डॉ. अजय आर्य ने की।
बैठक में संगठन की नई जिम्मेदारियों के लिए सर्वसम्मति से हेमा सक्सेना को अध्यक्ष, नमित क्षत्रिय को महासचिव, वंदना सिंह को उपाध्यक्ष तथा हर्षा ताम्रकार को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया। वहीं, सुशीला सिन्हा, रेखा पंड्या और राजकुमार भल्ला को वरिष्ठ सदस्य चुना गया। सदस्यों ने उम्मीद जताई कि नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन के सेवा कार्यों को और व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मपरिवर्तन, साधना और ज्ञान की प्रेरणा देता है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए व्यक्ति निर्माण और सेवाभाव का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल किसी की आवश्यकता पूरी करना नहीं, बल्कि उसके जीवन में सम्मान, अपनत्व और आशा का संचार करना भी है। आध्यात्मिकता का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा और समाज के कल्याण में दिखाई देता है। उन्होंने भिलाई-दुर्ग सहित आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्यों में योगदान देने की अपील की।
नवमनोनीत अध्यक्ष हेमा सक्सेना ने कहा कि अध्यात्म पथ सेवा परिवार का उद्देश्य सेवा को किसी पर्व या विशेष अवसर तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन का संस्कार बनाना है। दीपावली पर जरूरतमंद परिवारों को मिष्ठान्न और वस्त्र वितरित किए जाएंगे, ताकि वे भी त्योहार की खुशियों में सहभागी बन सकें। उन्होंने समाज के संवेदनशील नागरिकों से अभियान में सहयोग देने का आग्रह किया।
महासचिव नमित क्षत्रिय ने बताया कि दीपावली के बाद उपयोग योग्य पुराने कपड़े एकत्रित कर जरूरतमंदों तक पहुंचाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त नवंबर माह में दुर्ग-भिलाई के उद्यानों और कॉलोनियों में साइकिल रेस, जलेबी दौड़ तथा बोरा दौड़ सहित विभिन्न मनोरंजक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना है। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों, युवाओं और नागरिकों को योग, व्यायाम, शारीरिक सक्रियता तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित किया जाएगा।
अध्यात्म पथ सेवा परिवार, छत्तीसगढ़ सेवा, परोपकार, आध्यात्मिक चेतना, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य करता है। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने प्रस्तावित गतिविधियों को सफल बनाने और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का संकल्प लिया। संगठन ने नागरिकों से अपील की कि वे इस दीपावली किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने में अपना योगदान दें। परिवार का संदेश है कि दीपों का प्रकाश घरों को रोशन करता है, जबकि सेवा का प्रकाश जीवन में खुशियां और उम्मीद जगाता है।