धमतरी की श्यामतराई वनोपज मंडी में औषधीय उत्पादों का कारोबार बढ़ा, 60 हजार रुपये से अधिक की खरीदी

धमतरी की श्यामतराई कृषि उपज मंडी में प्रत्येक सोमवार लगने वाली वनोपज मंडी में स्थानीय सहित कांकेर, कोंडागांव और बालोद जिले के संग्राहक तथा महिला स्व-सहायता समूह अपने उत्पाद बेचने पहुंच रहे हैं। 26 अक्टूबर को दो व्यापारियों ने 60 हजार रुपये से अधिक के वनोपज एवं औषधीय उत्पाद खरीदे। इससे स्थानीय उत्पादकों को बाजार उपलब्ध होने और स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

Oct 26, 2026 - 19:52
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धमतरी की श्यामतराई वनोपज मंडी में औषधीय उत्पादों का कारोबार बढ़ा, 60 हजार रुपये से अधिक की खरीदी

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l जिले की श्यामतराई स्थित कृषि उपज मंडी में वनोपज एवं औषधीय उत्पादों के कारोबार को विस्तार मिल रहा है। यहां प्रत्येक सोमवार को लगने वाली वनोपज मंडी में धमतरी सहित आसपास के जिलों के संग्राहक, किसान और महिला स्व-सहायता समूह अपने उत्पाद लेकर पहुंच रहे हैं। इससे परंपरागत वनोपज व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की संभावनाएं बन रही हैं।

बीते सोमवार, 19 अक्टूबर को अवकाश के कारण मंडी में कारोबार नहीं हुआ था। इसके स्थान पर बुधवार, 21 अक्टूबर को क्रय-विक्रय किया गया। इसके बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को मंडी में फिर से वनोपज एवं औषधीय उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई। इस दिन दो व्यापारियों ने इन उत्पादों की खरीदी की, जिसका कुल मूल्य 60 हजार रुपये से अधिक रहा। यह गतिविधि मंडी में परंपरागत वनोपज कारोबार की संभावनाओं और व्यापारियों की रुचि को दर्शाती है।

कांकेर से पहली बार पहुंचे वनोपज संग्राहक

कांकेर जिले के ग्राम गितपहर से पहुंचे घनश्याम जैन ने बताया कि वे हर्रा, बैचांदी, कयाफल, निशोध जड़ी और रागी सहित अन्य उत्पाद बेचने पहली बार श्यामतराई मंडी आए हैं। उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से इस मंडी की जानकारी मिली। उन्होंने यहां वनोपज उत्पादों की बिक्री के अनुभव को अच्छा बताया।

कोंडागांव की महिला समूह ने भी बेचे उत्पाद

कोंडागांव जिले के माकड़ी से किरण महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पहली बार अपने उत्पाद लेकर मंडी पहुंचीं। समूह की महिलाओं ने केउ कांदा, मालकामनी, नागरमोथा, हर्रा, बेहड़ा, जामुन की पत्तियां, कड़ु कांदा और मिसोध जड़ जैसे उत्पाद बिक्री के लिए प्रस्तुत किए। महिलाओं के मुताबिक, इनमें से कुछ उत्पादों का उपयोग पारंपरिक औषधीय तैयारियों में किया जाता है। समूह की भागीदारी से महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्थानीय उत्पादों के विपणन की संभावनाएं सामने आई हैं।

बालोद के संग्राहक ने 18 रुपये किलो बेचा हर्रा

बालोद जिले के मुड़खुसरा गांव से आए शम्भुराम ठाकुर हर्रा, इरानी अकलतरा और अश्वगंधा की जड़ सहित अन्य वनोपज लेकर पहुंचे थे। उन्होंने हर्रा के 10 किलोग्राम उत्पाद को 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंडी में कारोबार बढ़ने से आने वाले समय में वनोपज संग्राहकों को अधिक लाभ मिल सकेगा।

श्यामतराई की वनोपज मंडी ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े परंपरागत व्यापार को बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नियमित खरीद-बिक्री, व्यापारियों की भागीदारी और आसपास के जिलों से उत्पादकों की पहुंच बढ़ने से वनोपज के विपणन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे संग्राहकों और महिला समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार तलाशने में सुविधा मिल सकती है और धमतरी की व्यापारिक पहचान को भी मजबूती मिल सकती है।