एनआईटी रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ, अधिकार और आत्मनिर्भरता पर जोर
एनआईटी रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसरों के प्रति जागरूक कर समावेशी समाज के निर्माण को बढ़ावा देना है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में दिव्यांगजनों के अधिकारों, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 30 जुलाई 2026 से शुरू हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार के अवसरों, कौशल विकास कार्यक्रमों और स्वावलंबन के विभिन्न माध्यमों की जानकारी उपलब्ध कराना है।
उद्घाटन समारोह में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमणा राव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नेशनल करियर सर्विस सेंटर फॉर डिफरेंटली एबल्ड के सहायक निदेशक (रोजगार) डॉ. सुरेश कुमार कुशवाह विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे सहित संस्थान के कई अधिकारी, शिक्षक और प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे, डॉ. बुनिल कुमार बलाबांत्रे और डॉ. सत्य ईश्वरी जुज्जावरपु द्वारा किया गया।
स्वागत भाषण में डॉ. बुनिल कुमार बलाबांत्रे ने कहा कि दिव्यांगता को किसी व्यक्ति की सीमा नहीं, बल्कि जीवन को अलग दृष्टिकोण से देखने की क्षमता के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज से प्रत्येक व्यक्ति की योग्यता को पहचानने और समान अवसर प्रदान करने का आह्वान किया। इसके बाद डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे ने विशेष बच्चों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में डॉ. सुरेश कुमार कुशवाह ने कहा कि समाज में दिव्यांगजनों के प्रति सोच तेजी से बदल रही है। अब दया की भावना के बजाय अधिकार आधारित और संवेदनशील दृष्टिकोण को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. एन. वी. रमणा राव ने कहा कि एनआईटी रायपुर दिव्यांगजनों के लिए सुगम और समावेशी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि संस्थान में सुगम्य अधोसंरचना विकसित की गई है ताकि सभी को समान अवसर मिल सके। उन्होंने कार्यक्रम की थीम "सामर्थ्य का सशक्तिकरण" को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में डॉ. रमणा राव ने दिव्यांगता के मेडिकल मॉडल और सोशल मॉडल के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि वास्तविक चुनौती व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता नहीं, बल्कि समाज में मौजूद भौतिक और संरचनात्मक बाधाएं हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांगजन अधिकार सम्मेलन (UNCRPD) और भारत के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत दिव्यांगता की मान्यता प्राप्त श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 किया गया है तथा शिक्षा, रोजगार, समान अवसर, उचित समायोजन और सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।
एनआईटी रायपुर का यह दो दिवसीय कार्यक्रम दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, कौशल विकास को प्रोत्साहित करने तथा समावेशी और बाधा-मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।