KTU के चार शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए पीएचडी शोधकार्य, जनसंचार एवं मीडिया में नए शोध विषयों को मिलेगा प्रोत्साहन

रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार शोध केंद्र के चार शोधार्थियों ने शोध सलाहकार समिति (RAC) के समक्ष अपने पीएचडी शोधकार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। शोध में राजमार्गों पर दृश्य-संचार, बच्चों पर स्मार्टफोन की विषयवस्तु का प्रभाव, उरांव जनजाति की लोकसंचार परंपराएं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व संचार जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने शोधकार्यों की गुणवत्ता और सामाजिक प्रासंगिकता की सराहना की।

Oct 16, 2026 - 11:51
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KTU के चार शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए पीएचडी शोधकार्य, जनसंचार एवं मीडिया में नए शोध विषयों को मिलेगा प्रोत्साहन

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार शोध केंद्र के चार शोधार्थियों ने गुरुवार को शोध सलाहकार समिति (RAC) के समक्ष अपने पीएचडी शोधकार्यों का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों एवं समिति के सदस्यों ने शोधकार्यों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और सामाजिक महत्त्व की समीक्षा की। प्रस्तुत शोध विषयों को जनसंचार एवं मीडिया के क्षेत्र में नए अनुसंधान की संभावनाओं को बढ़ावा देने वाला बताया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने सभी शोधार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन शोधकार्यों से जनसंचार एवं मीडिया के क्षेत्र में शोध की नई संभावनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे अध्ययन अकादमिक शोध को नई दिशा देने और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों को समझने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शोधार्थियों के शोधकार्यों का प्री-सबमिशन जुलाई माह में संपन्न हुआ था। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए गए। संशोधित शोधकार्यों के प्रस्तुतीकरण के दौरान शोधार्थियों ने अपने अध्ययन के विषय, प्रमुख निष्कर्षों और शोध के सामाजिक एवं अकादमिक महत्त्व से समिति को अवगत कराया।

चार शोधार्थियों ने अलग-अलग विषयों पर प्रस्तुत किया शोध

शोधार्थी विनोद सावंत ने “भारतीय राजमार्गों पर चलित माध्यमों से होने वाले दृश्य-संचार के विविध आयामों का समीक्षात्मक अध्ययन” विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इस अध्ययन में भारतीय राजमार्गों पर चलने वाले ट्रकों पर लिखे संदेशों के माध्यम से होने वाले दृश्य-संचार, उसके स्वरूप और सामाजिक महत्त्व का विश्लेषण किया गया है।

शोधार्थी दीक्षा देशपांडे ने “बच्चों द्वारा स्मार्ट फोन पर देखी जाने वाली विषयवस्तु से उनके व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों का समीक्षात्मक अध्ययन” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इसमें स्मार्टफोन पर देखी जाने वाली सामग्री और बच्चों के व्यवहार में होने वाले संभावित परिवर्तनों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया गया है।

शोधार्थी विकास कुमार ने “जनजातीय समुदायों में लोकसंचार परंपराओं का अध्ययन—छत्तीसगढ़ की उरांव जनजाति के विशेष संदर्भ में” विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इस शोध में उरांव जनजाति की लोकसंचार परंपराओं, उनकी विशेषताओं और सांस्कृतिक महत्त्व को समझने का प्रयास किया गया है।

वहीं, शोधार्थी सैयद अमीर मुस्तफ़ा हाशमी ने “ए कम्पेरेटिव स्टडी ऑन बेटरमेंट ऑफ सोसायटी थ्रू कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कम्युनिकेशन इन छत्तीसगढ़ एंड झारखंड” विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इसमें छत्तीसगढ़ और झारखंड के संदर्भ में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) संचार के माध्यम से सामाजिक विकास और समाज की बेहतरी में होने वाले योगदान का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर शोध सलाहकार समिति (RAC) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र मोहंती ने कहा कि जनसंचार के क्षेत्र में नए और प्रासंगिक विषयों पर शोध को प्रोत्साहित करने के लिए शोध केंद्र निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रयास प्रदेश में जनसंचार संबंधी अनुसंधान को नए आयाम देंगे।

प्रस्तुतीकरण के दौरान विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रोफेसर एवं समिति सदस्य डॉ. आशुतोष मंडावी तथा पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर डॉ. नृपेन्द्र शर्मा कुमार ने भी शोधकार्यों के महत्त्व पर अपने विचार रखे और शोधार्थियों को बधाई दी।