बेमेतरा: सेजेस देवकर में जिला स्तरीय स्काउट-गाइड आपदा प्रबंधन शिविर शुरू, 163 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण
बेमेतरा जिले के पीएमश्री सेजेस देवकर में 24 से 27 अक्टूबर 2026 तक जिला स्तरीय वरिष्ठ स्काउट-गाइड, रोवर-रेंजर आपदा प्रबंधन सह यूथ फोरम शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर में जिले के चार विकासखंडों के 163 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्राथमिक उपचार, रस्सियों की गांठें, भूकंप से बचाव, जीवन रक्षा कौशल और आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l जिले में विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन और जीवन रक्षा कौशल का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से साजा विकासखंड के पीएमश्री सेजेस देवकर में जिला स्तरीय वरिष्ठ स्काउट-गाइड, रोवर-रेंजर आपदा प्रबंधन सह यूथ फोरम शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 24 से 27 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स जिला संघ बेमेतरा के जिला मुख्य आयुक्त राजेश पटेल तथा जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला आयुक्त स्काउट अभय जायसवाल के निर्देश और मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में जिले के चारों विकासखंड साजा, बेरला, बेमेतरा और नवागढ़ से कुल 163 स्काउट-गाइड, रोवर और रेंजर ने पंजीयन कराया है।
शिविर का शुभारंभ 24 अक्टूबर को पंजीयन के बाद ध्वज शिष्टाचार के साथ किया गया। चार दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में सतर्कता बरतने, प्रभावित लोगों की सहायता करने और प्राथमिक स्तर पर जीवन रक्षा के उपाय अपनाने की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार करना है, जिनमें उनकी तत्परता और बुनियादी कौशल किसी जरूरतमंद की सहायता में उपयोगी साबित हो सकें।
शिविर के दूसरे दिन प्रतिभागियों को रस्सियों में विभिन्न प्रकार की गांठें लगाने और प्राथमिक उपचार में इस्तेमाल होने वाली पट्टियों के प्रकार एवं उनके उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन छत्तीसगढ़ मुख्यालय रायपुर से आए आपदामित्र प्रशिक्षक छम्मन साहू ने आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपदा क्या है और आपदा आने से पहले, उसके दौरान तथा उसके बाद किस प्रकार तैयारी और सावधानी बरतनी चाहिए।
प्रशिक्षण सत्र में भूकंप के समय बचाव के उपाय, जीवन रक्षा कौशल (LSS), बिजली गिरने से सुरक्षा, विदेशी वस्तु के कारण सांस की नली में रुकावट यानी FBAO तथा बैक थ्रस्ट, हैम्लिच और फ्लैंक हैम्लिच जैसी बचाव विधियों की जानकारी दी गई। इन तकनीकों का उद्देश्य आपात स्थिति में शुरुआती सहायता देने की क्षमता विकसित करना है, ताकि प्रशिक्षित प्रतिभागी जरूरत पड़ने पर सामान्य नागरिकों की मदद कर सकें।
आयोजकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आपदा के समय सही निर्णय लेने, अनुशासन बनाए रखने और सामूहिक रूप से कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग आसपास होने वाली दुर्घटनाओं या आपात परिस्थितियों में लोगों की सहायता के लिए किया जा सकता है।
शिविर में रात्रि भोजन के बाद कैंप फायर का आयोजन भी किया गया। इसमें अलग-अलग स्थानों से आए विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ सहित भारत के अन्य राज्यों की लोक संस्कृति और लोक नृत्यों पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं को जानने और आपसी सहभागिता बढ़ाने का अवसर मिला।
शिविर के सुचारु संचालन के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं। अनुज राम साहू को शिविर संचालक, गौकरण लाल पाटिल को क्वार्टर मास्टर, डॉ. धर्मेंद्र वर्मा और विनिता खलको को स्वास्थ्य प्रभारी, ऐला राम देवांगन को स्थानीय प्रभारी तथा चन्द्रशेखर पटेल को मीडिया प्रभारी बनाया गया है। ईश्वर साहू मंच संचालन, भावना वैष्णव अनुशासन, योगेश साहू अतिथि सत्कार, मोहिता रेड्डी और जोगी राम वर्मा आवास व्यवस्था, ऋषभ सिंह राजपूत कैंप फायर, बोधी राम पुरैना सेशन तथा फनेन्द्र कुमार लोधी और पुनीत साहू कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
चार दिनों तक चलने वाले इस शिविर में आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार, जीवन रक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है।