मरवाही में एग्रीस्टैक पोर्टल बना किसानों की परेशानी, 9 किसानों का धान पंजीयन अटका; समर्थन मूल्य पर बिक्री को लेकर बढ़ी चिंता

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र में एग्रीस्टैक पोर्टल पर अप्रूवल नहीं मिलने से मालाडांड़ और देवगवां गांव के 9 किसानों का धान पंजीयन अटक गया है। किसानों का आरोप है कि लोक सेवा केंद्र में आवेदन किए करीब 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली। धान विक्रय पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 होने के कारण किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने और सहकारी समिति का कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।

Oct 30, 2026 - 17:18
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मरवाही में एग्रीस्टैक पोर्टल बना किसानों की परेशानी, 9 किसानों का धान पंजीयन अटका; समर्थन मूल्य पर बिक्री को लेकर बढ़ी चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, मरवाही l छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र से किसानों की परेशानी का मामला सामने आया है। यहां एग्रीस्टैक पोर्टल पर अप्रूवल नहीं मिलने के कारण 9 किसानों का धान पंजीयन अधर में लटक गया है। किसानों का आरोप है कि लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किए करीब 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनके पंजीयन को स्वीकृति नहीं मिली है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है कि कहीं वे इस वर्ष समर्थन मूल्य पर अपनी धान की फसल बेचने से वंचित न रह जाएं।

मामला मरवाही तहसील के ग्राम मालाडांड़ और देवगवां का है। यहां के प्रभावित किसानों ने अपनी समस्या को लेकर एसडीएम मरवाही को ज्ञापन सौंपा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि एग्रीस्टैक पोर्टल में आ रही तकनीकी समस्या का जल्द निराकरण कराया जाए, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका धान पंजीयन पूरा हो सके।

किसानों के मुताबिक, उन्होंने लगभग 20 दिन पहले लोक सेवा केंद्र के माध्यम से एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन के लिए आवेदन किया था। लेकिन लंबे समय बाद भी आवेदन अप्रूव नहीं हुआ। जब किसान इस समस्या को लेकर हल्का पटवारी के पास पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि पटवारी की आईडी में संबंधित किसानों का डेटा दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बाद किसानों को तहसीलदार कार्यालय में री-असाइन कराने के लिए कहा जा रहा है। इस प्रक्रिया के चलते किसान एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

किसानों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि धान विक्रय पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। यदि समय रहते उनके आवेदनों को अप्रूवल नहीं मिला और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो उन्हें समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। किसानों का कहना है कि खेती में पूरे साल मेहनत और पूंजी लगाने के बाद धान की बिक्री ही उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का प्रमुख आधार होती है।

प्रभावित किसानों ने बताया कि उन्होंने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सिवनी से खाद-बीज के साथ नगद ऋण भी लिया हुआ है। हर वर्ष किसान धान बेचकर इस कर्ज की अदायगी करते हैं। ऐसे में यदि पंजीयन समय पर पूरा नहीं हुआ तो उनकी धान बिक्री प्रभावित हो सकती है और कर्ज चुकाने में भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। किसानों के सामने अब दोहरी चिंता है—एक ओर धान बेचने की समय सीमा और दूसरी ओर सहकारी समिति से लिए गए ऋण की अदायगी।

किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि एग्रीस्टैक पोर्टल में लंबित आवेदनों की जांच कर तकनीकी समस्या को तत्काल दूर किया जाए। साथ ही जिन 9 किसानों का पंजीयन अप्रूवल के अभाव में अटका हुआ है, उनके आवेदनों को प्राथमिकता से स्वीकृत कराया जाए, ताकि वे समर्थन मूल्य पर धान बेचने के अवसर से वंचित न रहें।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस समस्या पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और अंतिम तिथि से पहले इन 9 किसानों का धान पंजीयन पूरा हो पाता है या नहीं।