जेलेंस्की ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक साक्षात्कार में रूस की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि रूस अपने आर्थिक ढांचे को भारत, चीन और कभी-कभी तुर्की के साथ होने वाले ऊर्जा कारोबार के सहारे चला रहा है। उन्होंने विशेष रूप से रूस से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार को युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति के अनुसार, रूस की अर्थव्यवस्था में तेल कारोबार की अहम भूमिका है। उनका दावा है कि अगर भारत और चीन जैसे देश रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दें तो रूस के लिए मौजूदा स्तर पर युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, यह जेलेंस्की का आकलन है और रूस की अर्थव्यवस्था तथा युद्ध पर तेल व्यापार के प्रभाव को लेकर अलग-अलग आर्थिक एवं राजनीतिक विश्लेषण मौजूद हैं।
जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर मीडिया से बातचीत में भी रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों को लेकर आशावान हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका से भी उन्हें उम्मीद है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यदि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध को कम करने से इनकार करते हैं तो वह चाहते हैं कि अमेरिका प्रतिबंधों से जुड़े अपने अधिकारों का इस्तेमाल करे।
जेलेंस्की का यह बयान अमेरिका की ओर से रूस और ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़े कदमों के बीच आया है। उनके अनुसार, नए अमेरिकी प्रतिबंधों से रूस पर दबाव बढ़ाया जा सकता है। उनका मानना है कि आर्थिक दबाव रूस को युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर करने में भूमिका निभा सकता है।
भारत लंबे समय से रूस के साथ ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में व्यापारिक संबंध रखता है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद को लेकर यूक्रेन और पश्चिमी देशों की ओर से भारत पर लगातार अलग-अलग तरह के दबाव और अपील सामने आती रही हैं। वहीं, रूस के साथ ऊर्जा व्यापार भारत की आर्थिक और ऊर्जा जरूरतों से भी जुड़ा हुआ है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। तेल की खरीद, प्रतिबंधों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसलों का असर केवल संबंधित देशों की अर्थव्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने को युद्ध समाप्त करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उन्होंने भारत समेत प्रमुख देशों से रूस के साथ ऊर्जा कारोबार पर पुनर्विचार करने की अपील की है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में आर्थिक प्रतिबंधों, कूटनीतिक प्रयासों और विभिन्न देशों की नीतियों की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग मत हैं।