विजय साहू का कांग्रेस पर निशाना: बैलेट पेपर से चुनाव में भी प्रदर्शन कमजोर, ईवीएम पर आरोप लगाने से नहीं लौटेगी राजनीतिक जमीन
भिलाई नगर में भाजपा नेता एवं छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने चुनावी परिणामों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन सीमित रहा, इसलिए पार्टी को ईवीएम पर सवाल उठाने के बजाय अपने संगठन, जनसंपर्क और राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, भिलाई l भाजपा नेता एवं छत्तीसगढ़ क्रेडा के पूर्व सदस्य विजय साहू ने चुनावी परिणामों को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने से कांग्रेस की खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस नहीं आएगी। पार्टी को अपनी चुनावी स्थिति का आकलन करते हुए संगठन की मजबूती, जनता से संवाद और जनसंपर्क पर ध्यान देना चाहिए। साहू ने कहा कि चुनावी परिणामों से सबक लेकर अपनी रणनीति में सुधार करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए जरूरी है।
विजय साहू ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की विधान परिषद सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन राज्यों की कुल 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस महज एक सीट जीत पाई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से हुआ, तब भी कांग्रेस अपेक्षित सफलता हासिल क्यों नहीं कर सकी। साहू ने कहा कि पार्टी को इन परिणामों के आधार पर अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस की चुनौती केवल मतदान प्रणाली से जुड़ी नहीं है, बल्कि जनता के साथ उसके संवाद और संगठन की जमीनी स्थिति से भी संबंधित है। उनके मुताबिक, चुनावी हार के बाद मतदान प्रक्रिया को विवाद का विषय बनाने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व को अपनी नीतियों, कार्यशैली और जनसंपर्क की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच विश्वास कायम करने के लिए राजनीतिक दलों को लगातार जनहित के मुद्दों पर काम करना और लोगों की समस्याओं से जुड़े रहना आवश्यक है।
साहू ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव से संबंधित शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है। हालांकि, उनके अनुसार, लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना भी जरूरी है। केवल चुनावी हार को अनियमितता का प्रमाण मान लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ-साथ आरोपों को प्रमाणों के आधार पर सामने रखना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक कमजोरियों का समाधान संगठन और जनता के बीच तलाशना चाहिए। केवल आरोप-प्रत्यारोप से किसी दल की विश्वसनीयता मजबूत नहीं होती। इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, आम लोगों से संवाद बढ़ाना और जनहित से जुड़े विषयों पर लगातार काम करना जरूरी है।
विजय साहू ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास जवाबदेही, जनसंपर्क और जनहित के मुद्दों पर निरंतर काम करने से अर्जित होता है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह ईवीएम पर आरोप लगाने के बजाय अपने चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक स्थिति पर अधिक ध्यान दे। उनके इस बयान ने चुनावी हार, मतदान प्रणाली और राजनीतिक दलों की जवाबदेही को लेकर जारी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।