यूसीसी पर महिलाओं ने रखी बेबाक राय, लिव-इन पंजीयन और संपत्ति में समान अधिकार की उठी मांग

रायपुर में छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मुद्दों पर सुझाव रखे। महिलाओं ने पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, भरण-पोषण के लिए एक समान नियम, आपसी सहमति से तलाक की सरल प्रक्रिया और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन की मांग की। समिति ने सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया।

Oct 7, 2026 - 17:43
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यूसीसी पर महिलाओं ने रखी बेबाक राय, लिव-इन पंजीयन और संपत्ति में समान अधिकार की उठी मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर रायपुर में महिलाओं ने विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष विभिन्न व्यावहारिक और कानूनी सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं के सुझावों को सुना और उन्हें समिति के समक्ष विचार के लिए रखने का आश्वासन दिया।

बैठक में महिलाओं ने लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकार को प्रमुख मुद्दा बनाया। शताब्दी पाण्डेय ने धर्म आधारित कानूनों में बदलाव की आवश्यकता बताते हुए पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं तथा पुरुषों को समान अधिकार देने की मांग रखी। उन्होंने भरण-पोषण के नियमों में समानता और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने की बात कही। महिलाओं ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल प्रदेश है, इसलिए यूसीसी से जुड़े प्रावधान तैयार करते समय आदिवासी समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

बैठक में पंचायत स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष डेस्क बनाए जाने का सुझाव भी सामने आया। महिलाओं का कहना था कि कानून और अधिकारों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाएं समय रहते कानूनी सहायता प्राप्त कर सकें।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। श्वेता पड्डा ने महिलाओं के शोषण की रोकथाम के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन को अनिवार्य किए जाने की मांग की। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकार सुनिश्चित करने तथा उनकी जैविक पहचान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर जोर दिया।

अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपनी बात रखी और इस विषय में स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता बताई। वहीं अधिवक्ता हेमलता सिंह ने यूसीसी का उद्देश्य कानूनी भेदभाव को कम कर व्यवस्था को सरल बनाने से जोड़ा। गीता श्याम दलाल ने समान कानून की अवधारणा का समर्थन करते हुए कहा कि अपराध को धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, जबकि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी परंपराओं और मान्यताओं का पालन करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

आस्था अभय काले ने कहा कि किसी भी कानूनी व्यवस्था का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़ी कमजोर महिलाओं तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए महिलाओं में कानूनी अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में आकांक्षा तिवारी, भारती यादव, रत्ना पाण्डेय, पुरोहित और प्रसन्ना राजेश अवस्थी, अर्चना वोरा, शेफाली पुरोहित, शीला शर्मा, नमिता शेष और मालती मिश्रा सहित अन्य महिलाओं ने बच्चों के हितों, आदिवासी समाज की सहभागिता और विवाह परंपराओं से जुड़े सुझाव समिति के समक्ष रखे।

समिति ने महिलाओं की इस संवादात्मक पहल की सराहना की और बैठक में सामने आए व्यावहारिक सुझावों को संबंधित स्तर पर विचार के लिए प्रमुखता से रखने का भरोसा दिलाया। बैठक में उठाए गए मुद्दों ने यूसीसी में महिलाओं के अधिकार, बच्चों के हित, संपत्ति में समानता और स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं के संतुलन को लेकर चल रही चर्चा को सामने रखा।