बप्पा को भोग लगाने के लिए बनाएं स्पेशल बूंदी मोदक, इस ट्रिक से फूली-फूली बनेगी बूंदी
गणपति उत्सव में मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। इस बार आप चावल या आटे के मोदक की जगह बूंदी मोदक बना सकते हैं। बेसन, चाशनी और ड्राई फ्रूट्स से तैयार यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ देखने में भी आकर्षक लगती है। बूंदी को फूली-फूली बनाने के लिए घोल की सही कंसिस्टेंसी और उसे अच्छी तरह फेंटना जरूरी है।
UNITED NEWS OF ASIA. गणपति उत्सव के दौरान भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। आमतौर पर घरों में चावल, नारियल या गेहूं के आटे से मोदक तैयार किए जाते हैं, लेकिन अगर इस बार कुछ अलग और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो बूंदी मोदक ट्राई कर सकते हैं। बूंदी की दानेदार बनावट, मीठी चाशनी और ड्राई फ्रूट्स का स्वाद इस मिठाई को खास बनाता है। इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और गणपति बप्पा के भोग के साथ परिवार के लिए भी परोसा जा सकता है।
बूंदी मोदक बनाने के लिए सबसे पहले बूंदी तैयार करनी होगी। इसके लिए एक कप बेसन में एक चुटकी बेकिंग सोडा मिलाएं और थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर चिकना घोल तैयार करें। घोल न तो बहुत गाढ़ा होना चाहिए और न ही बहुत पतला। इसकी कंसिस्टेंसी ऐसी होनी चाहिए कि झारे से गिराने पर बेसन आसानी से छोटी-छोटी बूंदों के रूप में तेल में गिर सके। बूंदी को फूली-फूली बनाने के लिए घोल को करीब दो से तीन मिनट तक अच्छी तरह फेंटना एक आसान ट्रिक हो सकती है। इससे घोल में थोड़ी हवा शामिल होती है और बूंदी की बनावट बेहतर हो सकती है। बेकिंग सोडा बहुत अधिक मात्रा में न डालें।
अब कड़ाही में तेल या घी को मध्यम गर्म करें। बूंदी वाले झारे को कड़ाही के ऊपर रखकर उस पर थोड़ा बेसन का घोल डालें और झारे को हल्के हाथ से थपथपाएं। इससे छोटी-छोटी बूंदें तेल में गिरेंगी। बूंदी को बहुत ज्यादा देर तक न तलें। हल्की सुनहरी होने पर इसे निकाल लें। इसी तरह पूरा घोल इस्तेमाल करके बूंदी तैयार कर लें।
इसके बाद चाशनी बनाने की तैयारी करें। एक पैन में एक कप चीनी और करीब आधा कप पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। चाशनी को बहुत ज्यादा गाढ़ा करने की जरूरत नहीं है। इसमें आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और स्वाद के अनुसार केसर के कुछ धागे डाल सकते हैं। चाशनी तैयार होने पर गैस धीमी कर दें और इसमें तैयार बूंदी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। कुछ मिनट तक बूंदी को चाशनी सोखने दें।
जब बूंदी हल्की गर्म और चिपचिपी हो जाए तो इसे मोदक के सांचे में भरें। हल्के हाथ से दबाकर बूंदी को सेट करें और फिर सांचा खोलकर मोदक निकाल लें। अगर मोदक का सांचा उपलब्ध नहीं है तो हाथों की मदद से भी बूंदी को मोदक का आकार दिया जा सकता है। तैयार मोदक को कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और सूखे नारियल से सजाएं।
बूंदी मोदक बनाते समय घोल की कंसिस्टेंसी और तेल का तापमान सही रखना सबसे जरूरी है। बहुत पतला घोल होने पर बूंदी का आकार बिगड़ सकता है, जबकि ज्यादा गाढ़े घोल से बूंदी झारे से ठीक तरह नहीं गिरेगी। तेल बहुत तेज गर्म होने पर बूंदी जल्दी ब्राउन हो सकती है। इसी तरह चाशनी को बहुत गाढ़ा करने या बूंदी को उसमें ज्यादा देर पकाने से मोदक सख्त हो सकते हैं। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर घर पर स्वादिष्ट बूंदी मोदक तैयार किए जा सकते हैं।