स्मार्ट सिटी मिशन पर RTI से उठे सवाल, देशभर में 8,047 करोड़ के 259 प्रोजेक्ट अधूरे होने का दावा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता और छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर स्मार्ट सिटी मिशन में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, मिशन की समय-सीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त होने के बाद भी देश के 100 स्मार्ट शहरों में 8,047 करोड़ रुपये की लागत वाले 259 प्रोजेक्ट अधूरे हैं। उन्होंने रायपुर स्मार्ट सिटी में 1.82 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट फंड से प्रशासनिक खर्च में उधार लेने और केंद्रीय फंड में 37 करोड़ रुपये की कथित कटौती पर भी सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता ने मामले में CAG ऑडिट और जांच की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l देशभर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की स्थिति और उनके वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर मिशन में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का दावा किया है। उनके अनुसार, देश के 100 स्मार्ट शहरों में 8,047 करोड़ रुपये की लागत वाले 259 प्रोजेक्ट मिशन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी अधूरे हैं।
मनोज सिंह ठाकुर के मुताबिक, मंत्रालय के स्मार्ट सिटी मिशन डिवीजन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी RTI जवाब और उसके साथ उपलब्ध कराए गए उपयोगिता प्रमाण-पत्रों तथा Annexure-II में परियोजनाओं की स्थिति का विवरण दिया गया है। इन दस्तावेजों के अनुसार, देश के 100 स्मार्ट शहरों में कुल 8,064 प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे, जिनकी अनुमानित लागत 1,64,811 करोड़ रुपये थी। इनमें से 7,805 प्रोजेक्ट पूरे दर्ज हैं, जबकि 259 प्रोजेक्ट अब भी निर्माण या क्रियान्वयन के चरण में बताए गए हैं। इन अधूरे कार्यों की कुल लागत 8,047 करोड़ रुपये बताई गई है।
15 शहरों में 4,497 करोड़ के प्रोजेक्ट लंबित होने का दावा
जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि मंत्रालय की सूची के अनुसार कल्याण-डोंबिवली में 523 करोड़, पोर्ट ब्लेयर में 439 करोड़, तिरुपति में 433 करोड़, सिलवासा में 421 करोड़ और करनाल में 401 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अधूरे हैं। इसके अलावा ठाणे, ग्रेटर वारंगल, कवरत्ती, पुडुचेरी, देहरादून, बिहारशरीफ, आइजोल, नागपुर, काकीनाडा और सागर में भी परियोजनाएं लंबित बताई गई हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 161 करोड़ रुपये के आठ और रायपुर में 27 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट अधूरे दर्ज हैं।
रायपुर स्मार्ट सिटी के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, 12 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित उपयोगिता प्रमाण-पत्र में प्रशासनिक एवं कार्यालयीन खर्च के लिए निर्धारित राशि के अतिरिक्त 1.825 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट फंड से उधार लेकर खर्च किए जाने का उल्लेख है। उन्होंने इसे विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि के उपयोग से जुड़ा गंभीर वित्तीय मुद्दा बताया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जबलपुर, इंदौर, भुवनेश्वर और नागपुर को केंद्र से 490-490 करोड़ रुपये मिले, जबकि रायपुर को 453 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस अंतर के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई है।
CAG ऑडिट और जांच की मांग
मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालय ने RTI के जवाब में स्मार्ट सिटी मिशन के 31 मार्च 2025 को समाप्त होने की जानकारी दी है और संबंधित शिकायतों के मामलों में स्थानीय राज्य सरकारों तथा संबंधित SPV की जिम्मेदारी का उल्लेख किया है। उन्होंने पूरे मामले में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से फॉरेंसिक ऑडिट कराने और जांच एजेंसियों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र जांच शुरू नहीं हुई तो वे जनहित याचिका दायर करने पर विचार करेंगे।
फिलहाल ये आरोप और आंकड़े अधिवक्ता द्वारा RTI दस्तावेजों के आधार पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत किए गए हैं। संबंधित मंत्रालय या रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का पक्ष इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।