रायपुर में 50 पांच सितारा कोयला खदानों को मिला स्टार रेटिंग पुरस्कार, छत्तीसगढ़ की पांच खदानें भी सम्मानित
रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में कोयला मंत्रालय द्वारा स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह 2026 आयोजित किया गया। वित्त वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन के आधार पर देश की 50 पांच सितारा कोयला एवं लिग्नाइट खदानों को सम्मानित किया गया। इनमें 15 भूमिगत और 35 ओपनकास्ट खदानें शामिल हैं। छत्तीसगढ़ की पांच खदानों को भी पांच सितारा रेटिंग प्राप्त हुई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l कोयला खनन के क्षेत्र में सुरक्षित, कुशल और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रायपुर में स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह 2026 का आयोजन किया गया। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा दो नवंबर को मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित इस समारोह में वित्त वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन के आधार पर देश की 50 पांच सितारा कोयला एवं लिग्नाइट खदानों को सम्मानित किया गया। इनमें 15 भूमिगत और 35 ओपनकास्ट खदानें शामिल हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने चयनित खदानों के प्रतिनिधियों को पुरस्कार प्रदान किए। अपने संबोधन में उन्होंने कोयला क्षेत्र में उत्कृष्टता, सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जिम्मेदार खनन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि खनन गतिविधियों में सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस समारोह में छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष उपलब्धि रही। पांच सितारा रेटिंग प्राप्त खदानों की सूची में दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की तीन भूमिगत खदानों को स्थान मिला है। इनमें बंगवार अंडरग्राउंड माइन, खैराहा UG माइन और बहेराबांध UG माइन शामिल हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड की गेरे पेलमा सेक्टर-III कोल माइन और पारसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड की पारसा ईस्ट एंड कांटा बासन ओपनकास्ट कोल माइन को भी पांच सितारा रेटिंग प्रदान की गई है।
कोयला मंत्रालय की स्टार रेटिंग नीति के तहत देश की कोयला एवं लिग्नाइट खदानों का निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इसमें खदानों की परिचालन दक्षता, उत्पादन और उत्पादकता, तकनीकी नवाचार, कर्मचारियों का स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाता है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों के कल्याण के लिए किए गए प्रयासों को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाता है।
मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया कोयला नियंत्रक संगठन (CCO) द्वारा नियुक्त समीक्षकों के माध्यम से पूरी की जाती है। इस प्रणाली का उद्देश्य खदानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित कार्यसंस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के अपर सचिव सानोज कुमार झा, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम और कोयला नियंत्रक संगठन, नई दिल्ली के कोयला नियंत्रक सतीश कुमार सहित मंत्रालय तथा विभिन्न कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कोयला मंत्रालय की यह पहल ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में कोयला क्षेत्र की भूमिका को मजबूत करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित करती है। छत्तीसगढ़ की पांच खदानों को मिली पांच सितारा रेटिंग राज्य के खनन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।