सेवा संकल्प से पोषण संकल्प तक, जंक फूड पर खर्च घटाकर बच्चों की थाली में बढ़ाएं पोषण

राज्य पोषण सलाहकार यामिनी तिवारी ने सेवा संकल्प अभियान को बच्चों के पोषण से जोड़ते हुए परिवारों से जंक फूड पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम कर पौष्टिक और स्थानीय खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बदलावों के जरिए बच्चों के भोजन में विविधता और पोषण बढ़ाया जा सकता है।

Sep 21, 2026 - 16:21
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सेवा संकल्प से पोषण संकल्प तक, जंक फूड पर खर्च घटाकर बच्चों की थाली में बढ़ाएं पोषण

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l सेवा केवल जरूरतमंद व्यक्ति की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इस भावना को जनभागीदारी से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को भी प्राथमिकता देने की पहल की जा सकती है। राज्य पोषण सलाहकार यामिनी तिवारी ने कहा कि परिवार जंक फूड पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करके उसी राशि का उपयोग बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में कर सकते हैं। उनका कहना है कि छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास बच्चों की खान-पान की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार हो सकते हैं।

आज के समय में चिप्स, नमकीन, क्रीम बिस्कुट, चॉकलेट और मीठे पेय बच्चों की पसंद का हिस्सा बनते जा रहे हैं। प्रतिदिन 20 से 30 रुपये का खर्च भले ही कम दिखाई दे, लेकिन महीनेभर में यही राशि करीब 600 से 900 रुपये तक पहुंच सकती है। इस खर्च को सोच-समझकर किया जाए तो परिवार अपनी उपलब्धता और स्थानीय खाद्य विकल्पों के अनुसार भुना चना, मूंगफली, केला, मौसमी फल, पोहा, उपमा, दूध या घर में तैयार नाश्ते को बच्चों के भोजन में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में सवाल केवल खर्च की राशि का नहीं, बल्कि यह भी है कि उस खर्च के बदले बच्चे को कितना पोषण मिल रहा है।

यामिनी तिवारी के अनुसार बच्चों की भोजन संबंधी पसंद को अचानक बदलने के बजाय धीरे-धीरे बेहतर विकल्पों की ओर ले जाना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। चिप्स की जगह भुना चना या मूंगफली, पैकेट नमकीन की जगह घर का पोहा या चिवड़ा, क्रीम बिस्कुट की जगह केला और चना, मीठे पेय की जगह दूध या छाछ तथा इंस्टेंट नूडल्स की जगह सब्जियों से तैयार पोहा या उपमा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह खराब बताना नहीं, बल्कि बच्चों के भोजन में स्थानीय, विविध और पौष्टिक विकल्पों की हिस्सेदारी बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण के लिए हमेशा महंगे खाद्य पदार्थों की आवश्यकता नहीं होती। चना, मूंगफली, दालें, सोयाबीन, रागी और अन्य मोटे अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध, दही और अंडा जैसे खाद्य पदार्थ भोजन में विविधता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं। पोहा में सब्जियां और मूंगफली मिलाना, अंकुरित चना या मूंग को नाश्ते में शामिल करना और मौसम के अनुसार फल देना जैसे छोटे प्रयास परिवार की रोजमर्रा की भोजन व्यवस्था का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

बच्चों को केवल जंक फूड से दूर रहने के लिए कहने के बजाय उन्हें पौष्टिक विकल्पों के फायदे समझाने पर भी जोर दिया गया है। परिवार बच्चों के साथ भोजन को लेकर संवाद कर उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का रूप देने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बच्चे की थाली में एक फल जोड़ना, पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराना, घर के भोजन को प्राथमिकता देना और जंक फूड पर अनावश्यक खर्च कम करना पोषण की दिशा में छोटे लेकिन उपयोगी कदम हो सकते हैं। सेवा संकल्प के साथ पोषण संकल्प अपनाकर परिवार बच्चों के स्वस्थ भोजन की आदतों को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं।