संभावनाओं का गढ़ है छत्तीसगढ़: राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने दीप प्रज्वलित कर मनाया 26वां राज्य स्थापना दिवस, प्रदेश की खुशहाली की कामना
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने रायपुर के कलेक्टर चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर 26वां राज्य स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत राजकीय गीत 'अरपा पैरी के धार' से हुई। समाजजनों ने छत्तीसगढ़ महतारी को पुष्पांजलि अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी को याद किया गया। वक्ताओं ने सामाजिक एकता, शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और प्रदेश के विकास में सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज द्वारा राजधानी रायपुर के कलेक्टर चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के समक्ष गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों, सदस्यों और गणमान्य नागरिकों ने दीप प्रज्वलित कर छत्तीसगढ़ राज्य का 26वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के राजकीय गीत 'अरपा पैरी के धार' से हुआ। इसके बाद उपस्थित समाजजनों ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और दीप जलाकर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी याद किया गया।
राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक अधिवक्ता भगवानू नायक, राष्ट्रीय प्रभारी बनमाली छूरा और राष्ट्रीय युवा संगठन प्रभारी आशीष तांडी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और राज्य निर्माण के संघर्ष को याद करते हुए प्रदेश के विकास में सामूहिक योगदान का संकल्प लेना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त किशोर महानंद उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण जननायकों, आंदोलनकारियों और आम जनता के लंबे संघर्ष एवं बलिदान का परिणाम है। प्रदेश की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक समरसता और मेहनतकश जनता से है। उन्होंने सभी वर्गों से सामाजिक एकता और अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के वरिष्ठ नेता उदयभान सिंह चौहान ने कहा कि अलग छत्तीसगढ़ राज्य का सपना अनेक आंदोलनकारियों के संघर्ष और त्याग से साकार हुआ है। राज्य स्थापना दिवस उन सभी महापुरुषों और आंदोलनकारियों के योगदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक राज्य नहीं, बल्कि यहां के लोगों की पहचान, संस्कृति, माटी और भावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महासमाज सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। समाज का उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना, युवाओं और महिलाओं को आगे लाना तथा नशामुक्त, संगठित और समृद्ध समाज का निर्माण करना है।
राष्ट्रीय प्रभारी बनमाली छूरा ने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं का गढ़ है। प्रदेश की गौरवशाली विरासत और सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए युवाओं सहित समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए।
राष्ट्रीय युवा संगठन प्रभारी आशीष तांडी ने बताया कि स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश की खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत करना संगठन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम में कपिलेश्वर बाघ, अधिवक्ता कैलाश हरपाल, मनोज सोना, बिट्टू क्षत्रि, जयलाल नायक, हरिचरण महानंद, वीरेंद्र सोना, धूबले तांडी, नरोत्तम नायक, अधिवक्ता पारस नायक, अधिवक्ता अर्जुन छूरा, अधिवक्ता संध्या विभार, पुष्पा नायक, लता बाघ, नीला नायक, नंदनी दीप और सीमा नायक सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।