हर गांव में बनेगा बाल सुरक्षा तंत्र, ग्राम स्तरीय सतर्कता समिति गठित करने की पहल: डॉ. वर्णिका शर्मा

कोरबा में बालिका के साथ हुई गंभीर घटना और उसकी मृत्यु के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रभावित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को आवश्यक सहायता, बच्चे की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए ग्राम एवं पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण एवं सतर्कता समितियां गठित करने की पहल की घोषणा की। प्रस्तावित समितियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि और महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

Nov 1, 2026 - 11:02
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हर गांव में बनेगा बाल सुरक्षा तंत्र, ग्राम स्तरीय सतर्कता समिति गठित करने की पहल: डॉ. वर्णिका शर्मा

UNITED NEWS OF ASIA. कोरबा l छत्तीसगढ़ में बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्राम एवं पंचायत स्तर पर मजबूत व्यवस्था विकसित करने की पहल की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा है कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गांवों में ऐसी सतर्कता व्यवस्था विकसित करना जरूरी है, जिससे संभावित खतरों की समय रहते पहचान की जा सके। इसके लिए आयोग की ओर से ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण एवं सतर्कता समितियों के गठन की पहल की जाएगी।

यह पहल कोरबा जिले में एक बालिका के विरुद्ध हुए गंभीर अनाचार और उसकी मृत्यु की घटना के बाद सामने आई है। इस मामले में डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रभावित परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने परिवार की वर्तमान परिस्थितियों और जरूरतों की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

डॉ. शर्मा ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को निर्देशित किया कि वे परिवार के लगातार संपर्क में रहें और परिवार के अन्य बच्चे की शिक्षा किसी भी स्थिति में बाधित न होने दें। इसके लिए आवश्यक शैक्षणिक एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने को कहा गया। उन्होंने बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और शिक्षा पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। साथ ही परिवार की गोपनीयता, गरिमा और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखने की बात कही।

डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पूरे समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। पहले पड़ोस और समुदाय के लोग भी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में सहयोग करते थे, लेकिन एकल परिवारों के बढ़ते चलन और सामाजिक संपर्कों में कमी के कारण बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे में सामुदायिक जिम्मेदारी को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।

इसी उद्देश्य से आयोग ग्राम एवं पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण एवं सतर्कता समितियों के गठन के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर प्रस्ताव तैयार करेगा। प्रस्तावित समितियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय महिलाओं और जिम्मेदार नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

इन समितियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करना, जरूरतमंद बच्चों को सरकारी सहायता और संरक्षण सेवाओं से जोड़ना तथा किसी बच्चे की सुरक्षा से संबंधित गंभीर चिंता या संभावित अपराध की सूचना तत्काल सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाना होगा। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि समितियां जागरूकता, सहयोग और सूचना देने तक सीमित रहेंगी। अपराध की जांच और कानूनी कार्रवाई संबंधित सक्षम एजेंसियां ही करेंगी।

उन्होंने नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर न करें। नाम, तस्वीर, पता और परिवार की पहचान बताने वाले विवरण साझा करने से बचें। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल सुरक्षा परिवार, समाज, प्रशासन और प्रत्येक जागरूक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उद्देश्य यह होना चाहिए कि हर बच्चा सुरक्षित रहे, उसकी शिक्षा जारी रहे और उसे भयमुक्त वातावरण में अपना बचपन जीने का अवसर मिले।