MMI Narayana Hospital Raipur में फेफड़ों की सेहत पर जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

MMI Narayana Hospital, Raipur में “हर सांस, हर पल” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण, धूम्रपान, अस्थमा, COPD, टीबी और स्लीप एपनिया जैसे विषयों पर जानकारी देते हुए समय पर जांच, सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

Oct 26, 2026 - 13:10
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MMI Narayana Hospital Raipur में फेफड़ों की सेहत पर जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने बताए बचाव के उपाय

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l MMI Narayana Hospital, Raipur में सांस की सेहत से जुड़े जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत “हर सांस, हर पल” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को फेफड़ों की सेहत, सांस से जुड़ी आम बीमारियों और उनसे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना था। चर्चा में विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और बदलती जीवनशैली के फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। साथ ही समय पर जांच और उचित उपचार के महत्व पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में डॉ. दिपेश मस्के, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी; डॉ. आकांक्षा सरडा सक्सेना, एसोसिएट कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी और डॉ. दिव्या मल्ले, एसोसिएट कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। सत्र का संचालन डॉ. जितेंद्र चंद्राकर, कंसल्टेंट, इमरजेंसी मेडिसिन ने किया। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की।

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार खांसी, सांस फूलना और सांस लेते समय घरघराहट जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग इन परेशानियों को मौसम, उम्र या थकान का असर मान लेते हैं, जबकि ये किसी बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं। ऐसे लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने घर और बाहर होने वाले वायु प्रदूषण के प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। खाना बनाने से निकलने वाला धुआं, सिगरेट का धुआं, वेपिंग और ई-सिगरेट फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और रूम फ्रेशनर से निकलने वाले कण भी कुछ लोगों में सांस की परेशानी बढ़ा सकते हैं। N95 मास्क प्रदूषण के कुछ कणों से बचाव में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर प्रकार के प्रदूषण से पूरी सुरक्षा नहीं देता।

अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करते हुए डॉक्टरों ने बताया कि अस्थमा केवल बच्चों में ही नहीं, बल्कि वयस्कों में भी हो सकता है। इनहेलर का सही तरीके से और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए। दवा की आदत पड़ने के डर से उपचार अपने आप बंद नहीं करना चाहिए।

सांस से जुड़े संक्रमण, टीबी, निमोनिया और स्लीप एपनिया पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने लंबे समय तक खांसी रहने पर जांच कराने और जरूरत के अनुसार टीकाकरण सहित बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों में निमोनिया अधिक गंभीर हो सकता है, जबकि मोटापा और नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने के लिए स्पाइरोमेट्री जैसी जांच उपयोगी हो सकती है। केवल पल्स ऑक्सीमीटर के आधार पर फेफड़ों की पूरी सेहत का आकलन नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने धूम्रपान छोड़ने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और प्रदूषण से बचने की सलाह दी। बिना चिकित्सकीय सलाह के घरेलू या हर्बल नुस्खों और बाजार में उपलब्ध खांसी की दवाओं के इस्तेमाल में सावधानी बरतने को भी कहा।

MMI Narayana Hospital, Raipur के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. एम. एम. माथवन ने कहा कि फेफड़ों की सेहत अच्छी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन लोग अक्सर सांस संबंधी समस्याओं को गंभीर होने तक नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने कहा कि “हर सांस, हर पल” जैसी पहल का उद्देश्य सही जानकारी पहुंचाना, गलतफहमियां दूर करना और लोगों को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम का समापन फेफड़ों की सेहत को प्राथमिकता देने, शुरुआती लक्षणों को पहचानने और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच एवं उपचार कराने के संदेश के साथ हुआ।