कोंडागांव में नौकरी लगाने के नाम पर 25 से 30 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

कोंडागांव जिले के फरसगांव और कोतवाली थाना क्षेत्र में पुलिस विभाग में बस्तर फाइटर और जिला बल में आरक्षक की नौकरी लगाने के नाम पर करीब 15 लोगों से 25 से 30 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी युवाओं से नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम और जरूरी दस्तावेज लेते थे। तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की जांच के बाद शत्रुधन टंडन को बिलासपुर के देवरीखुर्द और बुध सिंह मरकाम को फरसगांव के भर्रीपारा से पकड़ा गया। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, दस्तावेजों की फाइल, डायरी और रजिस्टर जब्त किए गए हैं।

Sep 5, 2026 - 14:49
 0  20
कोंडागांव में नौकरी लगाने के नाम पर 25 से 30 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव l पुलिस विभाग में बस्तर फाइटर और जिला बल में आरक्षक के पद पर नौकरी लगाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को फरसगांव और कोंडागांव पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फरसगांव और कोतवाली कोंडागांव थाना क्षेत्र के करीब 15 पीड़ितों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर लगभग 25 से 30 लाख रुपये की ठगी की है। पिछले करीब तीन महीने से आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की जांच के आधार पर दोनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया।

पुलिस के मुताबिक मामले में फरसगांव थाना क्षेत्र के यशवंत नेताम और अन्य पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि मस्तूरी निवासी शत्रुधन टंडन और उसके साथियों ने पुलिस विभाग में ऊंचे अधिकारियों से पहचान होने का दावा करते हुए बस्तर फाइटर और जिला बल में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। इस मामले में फरसगांव थाने में अपराध क्रमांक 49/2024 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसी तरह पंचू राम कोर्राम और अन्य शिकायतकर्ताओं से नौकरी लगाने के नाम पर रकम लेने के मामले में फरसगांव थाने में अलग अपराध दर्ज किया गया।

जगदीश मंडावी की शिकायत पर भी पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया, जबकि सूरज लाल नेताम की शिकायत पर कोतवाली कोंडागांव में तीन लाख रुपये की धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की।

पुलिस के अनुसार आरोपियों का तरीका यह था कि वे बेरोजगार युवाओं को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे और वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी कथित पहचान होने की बात कहते थे। नौकरी लगवाने के लिए युवाओं से एडवांस रकम लेने के साथ उनके आधार कार्ड, अंकसूची, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज भी लिए जाते थे। पुलिस का कहना है कि एडवांस रकम लेने के बाद आरोपी फरार हो जाते थे और पीड़ितों को नौकरी लगने के बाद बाकी रकम देने की बात कही जाती थी।

प्रकरण की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों के बैंक खातों और उन खातों का तकनीकी विश्लेषण किया, जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी। करीब तीन महीने तक चले इस विश्लेषण के बाद आरोपियों और उनके संभावित ठिकानों की पहचान की गई। इसके बाद फरसगांव और कोंडागांव पुलिस ने अलग-अलग टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की।

पुलिस के मुताबिक आरोपी लगातार स्थान बदलकर पुलिस को चकमा देने का प्रयास कर रहे थे। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी तलाश के दौरान बैंक खातों से मिले पते और मोबाइल नंबरों के तकनीकी विश्लेषण को आधार बनाया गया। इसके बाद पुलिस टीम ने बिलासपुर के देवरीखुर्द तोरवा क्षेत्र में दबिश देकर शत्रुधन टंडन को गिरफ्तार किया। दूसरे आरोपी बुध सिंह मरकाम को फरसगांव के भर्रीपारा से पकड़ा गया।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन, पीड़ितों के दस्तावेजों की फाइल, डायरी और रजिस्टर जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार मामले में कुल चार प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें तीन फरसगांव थाना और एक कोतवाली कोंडागांव थाना क्षेत्र का है। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक कोंडागांव पंकज चन्द्रा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी कोंडागांव रुपेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीमों की भूमिका रही। फरसगांव थाना प्रभारी निरीक्षक चन्द्रशेखर श्रीवास, कोंडागांव थाना प्रभारी निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, दोनों थानों की विवेचना टीम और जिला साइबर सेल ने आरोपियों की पतासाजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस मामले में आरोपियों के अन्य साथियों और ठगी से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।