खैरागढ़ के देवरी में सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, आबादी पट्टे के हस्ताक्षर पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के ग्राम देवरी में शासकीय जमीन पर कथित कब्जे, मुख्यमंत्री आबादी पट्टे पर संदिग्ध हस्ताक्षर और नियमों के उल्लंघन को लेकर शिकायत की गई है। आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा ने तत्कालीन सरपंच गंगोत्री वर्मा, पंच तेजराम वर्मा और हल्का पटवारी कृष्ण पटेल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से लेकर राज्यपाल तक शिकायत कर मामले में एफआईआर, कथित अवैध निर्माण हटाने और जांच के बाद कार्रवाई की मांग की है।

Oct 16, 2026 - 15:07
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खैरागढ़ के देवरी में सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, आबादी पट्टे के हस्ताक्षर पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ क्षेत्र के ग्राम देवरी में शासकीय जमीन पर कथित कब्जे, मुख्यमंत्री आबादी पट्टे पर संदिग्ध हस्ताक्षर और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा ने दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन सरपंच गंगोत्री वर्मा, उनके पति एवं पंच तेजराम वर्मा और हल्का पटवारी कृष्ण पटेल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

आबादी पट्टे के हस्ताक्षर को लेकर विवाद

शिकायतकर्ता के अनुसार, गंगोत्री वर्मा वर्ष 2015 से 2020 तक ग्राम पंचायत देवरी की सरपंच थीं। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान 18 मई 2018 को जारी मुख्यमंत्री आबादी पट्टे पर किए गए हस्ताक्षर अन्य पट्टों पर मौजूद हस्ताक्षरों से अलग दिखाई देते हैं। इस अंतर को लेकर पट्टे की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में यह दावा भी किया गया है कि तहसील के रिकॉर्ड में विवादित पट्टा सुभितरिन पति भुवन के नाम दर्ज है। हालांकि, हस्ताक्षरों की वास्तविकता और पट्टा जारी करने की प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

शासकीय जमीन पर निर्माण और मोबाइल टावर का मामला

नेमीचंद वर्मा ने शिकायत में खसरा नंबर 566 की जमीन पर कथित तौर पर वैध अनुमति के बिना दुकानों का निर्माण किए जाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा खसरा नंबर 437 पर आवासीय डायवर्सन होने के बावजूद मोबाइल टावर स्थापित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इन दोनों मामलों में राजस्व अभिलेखों, भूमि उपयोग की अनुमति और निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

कलेक्टर से राज्यपाल तक शिकायत

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने मामले को लेकर कलेक्टर से लेकर राज्यपाल तक शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत में कथित अवैध निर्माण हटाने, संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने और सरपंच को पद से हटाने की मांग शामिल है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।

निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई की मांग

ग्राम देवरी का यह मामला अब प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा में है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासन की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दस्तावेजों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।