पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल के मार्गदर्शन में जिले के थाना और चौकी प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में गांवों, बाजार-हाट और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों से सीधे संवाद किया। इस दौरान लोगों को बदलते साइबर अपराधों और उनसे बचने के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई।
जागरूकता कार्यक्रमों में पुलिस टीमों ने डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर, APK फाइल, ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, सेक्सटॉर्शन और बैंकिंग फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों के बारे में बताया। पुलिस ने समझाया कि साइबर अपराधी कई बार लोगों में डर, लालच या जल्दबाजी की स्थिति पैदा कर गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए।
पुलिस ने नागरिकों को विशेष रूप से अनजान लिंक, QR कोड और APK फाइल को खोलने या डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी। साथ ही OTP, ATM PIN, CVV, पासवर्ड और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की गई। सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा के लिए Two-Factor Authentication का इस्तेमाल करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की बात भी कही गई।
अभियान के दौरान पुलिस ने साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने पर भी जोर दिया। नागरिकों को बताया गया कि ठगी होने पर घबराने के बजाय बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। इसके साथ ही www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। पुलिस के अनुसार, घटना की जल्द सूचना मिलने पर ठगी की रकम को रोकने की कार्रवाई में सहायता मिल सकती है।
कबीरधाम पुलिस ने लोगों से अपील की कि साइबर सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत सावधानी के साथ-साथ परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक किया जाए। विशेष रूप से विद्यार्थियों, युवाओं और वृद्धजनों को साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी देने पर जोर दिया गया।
सातवें सप्ताह में भी अभियान के माध्यम से पुलिस ने ग्रामीण और बाजार क्षेत्रों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों के प्रति सतर्क करना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए जागरूक बनाना है।