देवभोग में निजी स्कूल वाहनों की जांच, बच्चों की सुरक्षा को लेकर DTO ने दिए सख्त निर्देश

गरियाबंद कलेक्टर के निर्देश पर देवभोग क्षेत्र के निजी स्कूलों में चलने वाले वाहनों की जांच की गई। जिला परिवहन अधिकारी अपनी टीम के साथ स्कूलों में पहुंचीं और वाहनों की फिटनेस, सुरक्षा उपकरण, चालक के लाइसेंस, सीसीटीवी, जीपीएस तथा निर्धारित क्षमता की जांच की। स्कूल प्रबंधनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए गए।

Aug 20, 2026 - 08:18
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देवभोग में निजी स्कूल वाहनों की जांच, बच्चों की सुरक्षा को लेकर DTO ने दिए सख्त निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र में निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने जांच अभियान चलाया। गरियाबंद कलेक्टर के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारी अपनी टीम के साथ अचानक देवभोग के विभिन्न निजी विद्यालयों में पहुंचीं और वहां संचालित स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया।

जांच के दौरान स्कूल बसों और वैन की फिटनेस के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मानकों की बारीकी से जांच की गई। परिवहन विभाग की टीम ने वाहन के दस्तावेज, फिटनेस प्रमाण पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र, चालक का लाइसेंस और अन्य जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

जिला परिवहन अधिकारी ने स्कूल प्रबंधनों को स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा नियमों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। स्कूली वाहनों को निर्धारित मानकों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप संचालित करना जरूरी है।

परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया कि प्रत्येक स्कूली बस और वैन के पास वैध फिटनेस तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र उपलब्ध होना चाहिए। वाहन चालकों के पास संबंधित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस होने के साथ पर्याप्त अनुभव भी होना आवश्यक है।

इसके अलावा प्रत्येक स्कूली वाहन में प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स और आग से बचाव के लिए चालू हालत में अग्निशामक यंत्र उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। बच्चों की निगरानी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों में सीसीटीवी कैमरा और जीपीएस सिस्टम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया।

जांच के दौरान वाहन की निर्धारित क्षमता का भी विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूली वाहन में निर्धारित सीटिंग कैपेसिटी से अधिक बच्चों को बैठाकर परिवहन नहीं किया जाएगा। ओवरलोडिंग की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, इसलिए स्कूल प्रबंधन को इस नियम का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया।

जिला परिवहन अधिकारी ने स्कूल प्रबंधनों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी स्कूली वाहन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित वाहन के साथ स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस जांच अभियान का उद्देश्य निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है। परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों से सभी आवश्यक दस्तावेज और सुरक्षा उपकरण दुरुस्त रखने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है।