मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त लौह शिल्प कलाकार तीजू राम विश्वकर्मा को पत्र लिखकर दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कोण्डागांव के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त लौह शिल्प कलाकार तीजू राम विश्वकर्मा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला के संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय पहचान और नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ने के उनके प्रयासों की सराहना की।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले कलाकारों के प्रयासों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त लौह शिल्प कलाकार तीजू राम विश्वकर्मा को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला को सहेजने, उसे नई पहचान दिलाने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्र में उल्लेख किया कि तीजू राम विश्वकर्मा ने अपने पिता से सीखी लौह शिल्प कला को वर्षों की मेहनत, लगन और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया है। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने इस पारंपरिक कला को न केवल जीवित रखा, बल्कि इसे रोजगार और आजीविका का माध्यम बनाकर अन्य कारीगरों के लिए भी अवसर तैयार किए हैं। मुख्यमंत्री ने उनके संघर्ष और कला के प्रति समर्पण को सराहनीय बताया।
पत्र में मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि तीजू राम विश्वकर्मा के बनाए लौह शिल्प ने देश के बाहर भी अपनी पहचान बनाई है। इटली और रूस में आयोजित प्रदर्शनियों में उनके कार्यों के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला। राज्य स्तरीय सम्मान के साथ राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करना न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की उपलब्धि है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय भी है।
मुख्यमंत्री ने पारंपरिक कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उनके प्रयासों की भी विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस कला का प्रशिक्षण देना और उन्हें पारंपरिक शिल्प से जोड़ना सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बस्तर की पहचान से जुड़ी यह कला आने वाले समय में भी जीवंत बनी रह सकेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को प्रोत्साहित करने में तीजू राम विश्वकर्मा जैसे कलाकारों की अहम भूमिका है। पारंपरिक शिल्प को बाजार और व्यापक पहचान मिलने से स्थानीय कारीगरों की आजीविका को मजबूती मिल सकती है। साथ ही इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री का आत्मीयता और स्नेह से भरा पत्र प्राप्त होने पर तीजू राम विश्वकर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की और उनके प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उनकी कला और प्रयासों की सराहना किया जाना उनके लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। इस प्रोत्साहन से उन्हें बस्तर की पारंपरिक लौह शिल्प कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए और अधिक उत्साह के साथ कार्य करने की प्रेरणा मिली है।
तीजू राम विश्वकर्मा का प्रयास केवल एक पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय कारीगरों को रोजगार, युवाओं को कौशल और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान भी मिल रही है। मुख्यमंत्री की ओर से मिला यह प्रोत्साहन क्षेत्र की पारंपरिक कलाओं और उन्हें सहेजने वाले कलाकारों के महत्व को भी रेखांकित करता है।