छत्तीसगढ़ के आश्रम-छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव? बाल अधिकार आयोग ने प्रस्तावित की नई SOP, मंत्री रामविचार नेताम ने दिए कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को मजबूत बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) प्रस्तावित की है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मंत्री रामविचार नेताम के साथ बैठक में कई सुझाव रखे, जिस पर मंत्री ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए।

Nov 4, 2026 - 19:47
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छत्तीसगढ़ के आश्रम-छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था में होगा बदलाव? बाल अधिकार आयोग ने प्रस्तावित की नई SOP, मंत्री रामविचार नेताम ने दिए कार्रवाई के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के आश्रम-छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों को लेकर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने प्रदेश के प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, एकलव्य, प्रयास और कन्या शिक्षा परिसरों सहित सभी आवासीय संस्थानों के बेहतर और सुरक्षित संचालन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) प्रस्तावित की है। इसका उद्देश्य बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों का प्रभावी पालन कराना है।

इस संबंध में 4 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश के आश्रमों और छात्रावासों में मौजूद व्यवस्थागत कमियों तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग की ओर से प्रस्तावित SOP के प्रमुख सुझावों पर मंत्री ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई करने की बात कही।

आयोग ने बच्चों की आकस्मिक मृत्यु रोकने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक छात्रावास को नजदीकी 24 घंटे संचालित स्वास्थ्य केंद्र यानी PHC या CHC और 108 संजीवनी एक्सप्रेस से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत किसी बच्चे को बुखार आने पर दो से छह घंटे के भीतर रक्त जांच और आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल रेफर करने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। मलेरिया, डायरिया, पीलिया, सिकलसेल और सर्पदंश जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए त्वरित उपचार की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है।

छात्रावासों के नियमित संचालन को लेकर भी आयोग ने कई सुझाव दिए हैं। प्रस्ताव के अनुसार अधीक्षकों का छात्रावास परिसर में ही रात्रि निवास अनिवार्य किया जाए। उनके मुख्यालय से बाहर रहकर आने-जाने और रसोइए या चौकीदार के भरोसे छात्रावास संचालन की व्यवस्था पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही रात 9 से 9:30 बजे के बीच जियो-फेंसिंग आधारित फेस अटेंडेंस और एक व्यक्ति को केवल एक छात्रावास का प्रभार देने का सुझाव दिया गया है।

कन्या छात्रावासों में बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर आयोग ने विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। इनमें महिला अधीक्षक, महिला रसोइया और महिला गार्ड की तैनाती तथा पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल है। सभी प्रवेश द्वारों पर 30 दिन के बैकअप वाले नाइट-विजन CCTV कैमरे, बाल सुरक्षा नीति और शिकायत पेटी स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।

आयोग ने भवनों की सुरक्षा के लिए मानसून से पहले स्ट्रक्चरल और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट, मानक बाउंड्रीवॉल और खिड़कियों में मच्छरदानी लगाने की सिफारिश की है। नए विद्यार्थियों के लिए 15 दिवसीय ओरिएंटेशन और संगवारी बडी सिस्टम लागू करने तथा क्लस्टर स्तर पर मनोवैज्ञानिक काउंसलर नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि बच्चों में मानसिक तनाव, आत्महत्या और पढ़ाई छोड़ने जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सके।

बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी का ABHA ID से जुड़ा डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने का सुझाव दिया गया है। सिकलसेल से प्रभावित बच्चों को रेड कार्ड श्रेणी में रखकर नियमित दवा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। भोजन भत्ता बढ़ाने के साथ रागी, कोदो-कुटकी, अंडा, दूध, हरी सब्जियां और गुड़-चना जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल करने का प्रस्ताव है। वहीं, कन्या छात्रावासों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन, इंसिनरेटर और साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड की व्यवस्था सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।

आयोग के अनुसार, इन प्रस्तावों का उद्देश्य आवासीय संस्थानों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और जवाबदेह वातावरण तैयार करना है। अब इन सुझावों पर विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।