चातुर्मास्य में भगवान शिव करते हैं संपूर्ण जगत का पालन : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
बेमेतरा जिले के सलधा में चातुर्मास्य प्रवास के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चातुर्मास्य की महिमा बताते हुए कहा कि देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि का पालन करते हैं। उन्होंने सावन में शिव पूजा, नियमित जीवन और ज्ञान-वर्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l बेमेतरा जिले के सलधा में आयोजित चातुर्मास्य प्रवास के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन परंपरा में चातुर्मास्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और इस अवधि में संपूर्ण सृष्टि के पालन-पोषण का दायित्व भगवान शिव निभाते हैं। इसी कारण सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भगवान विष्णु की दिनचर्या पूरी तरह नियमबद्ध है। वे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को योगनिद्रा में जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागृत होकर पुनः सृष्टि के पालन का कार्य संभालते हैं। इस बीच भगवान शिव माता भवानी के साथ समस्त संसार के कल्याण और संरक्षण का दायित्व निभाते हैं।
उन्होंने भगवान सूर्य की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि सूर्यदेव का तेज उनकी नियमित दिनचर्या और अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पंचांग में निर्धारित समय के अनुसार सूर्य का प्रतिदिन उदित होना नियमितता का सर्वोत्तम उदाहरण है। अनुशासित जीवन और परंपराओं के प्रति सम्मान मनुष्य को भी तेजस्वी और सफल बनाता है।
शंकराचार्य ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और ज्ञानार्जन का भी पर्व है। वर्षा ऋतु में जहां प्रकृति हरियाली से भर उठती है और खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं, वहीं संत-महात्माओं के प्रवचनों से समाज में ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की वर्षा भी उतनी ही आवश्यक है जितनी जीवन के लिए जल की वर्षा।
प्रवचन के दौरान उन्होंने 'हरीश्वर' की पावन कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया और श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों का पालन करने का संदेश दिया। उन्होंने सभी से नियमित पूजा-पाठ, सदाचार और सेवा भाव को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी अशोक साहू ने बताया कि सलधा में आयोजित चातुर्मास्य प्रवास के दौरान प्रतिदिन भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, उनकी दिव्य लीलाओं तथा सनातन धर्म के विभिन्न विषयों पर प्रवचन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन आनंद उपाध्याय ने किया, जबकि उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों का स्वागत स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने किया। कार्यक्रम में साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्मचारी, वैदिक पाठी विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य के प्रवचनों से आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की।