बलरामपुर शिक्षा विभाग की लापरवाही पर सवाल, एक शिक्षक को कार्यमुक्त करने दो बार जारी हुआ आदेश
बलरामपुर जिले के कुसमी में शिक्षक रामपत यादव को कार्यमुक्त करने के लिए शिक्षा विभाग को एक ही आदेश दो बार जारी करना पड़ा। आरोप है कि 15 जुलाई को आदेश जारी होने के बावजूद शिक्षक करीब साढ़े तीन महीने तक संबंधित स्थान पर बने रहे और स्कूल नहीं लौटे। प्राचार्य की ओर से बार-बार लिखित शिकायत किए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है। अब 29 अक्टूबर को दोबारा आदेश जारी होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुसमी क्षेत्र में शिक्षक रामपत यादव को कार्यमुक्त करने के लिए विभाग को एक ही आदेश दो बार जारी करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, पहला आदेश 15 जुलाई को जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक करीब साढ़े तीन महीने तक संबंधित स्थान पर बने रहे और स्कूल नहीं लौटे। अब 29 अक्टूबर को दोबारा आदेश जारी किए जाने के बाद विभागीय व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि जुलाई में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से शिक्षक रामपत यादव को कार्यमुक्त करने संबंधी आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने का आरोप है। इस दौरान संबंधित स्कूल में शिक्षक की अनुपस्थिति से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है। स्कूल के प्राचार्य द्वारा इस संबंध में कई बार लिखित शिकायत किए जाने का भी दावा किया गया है।
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब विभाग की ओर से 15 जुलाई को ही आदेश जारी कर दिया गया था, तो उसके पालन में करीब साढ़े तीन महीने की देरी क्यों हुई? यदि शिक्षक को कार्यमुक्त किया जा चुका था, तो वे लंबे समय तक संबंधित स्थान पर किस आधार पर बने रहे? वहीं, प्राचार्य की ओर से बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का विषय है।
जानकारी के अनुसार, मामले की शिकायत व्हाट्सएप के माध्यम से कलेक्टर तक पहुंचने के बाद विभाग ने 29 अक्टूबर को दोबारा आदेश जारी किया। इसके बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और नियमित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी आदेश के लंबे समय तक लंबित रहने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होना गंभीर चिंता का विषय है।
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि जुलाई में जारी आदेश का पालन समय पर क्यों नहीं हुआ, इसकी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
लोगों ने मांग की है कि लंबे समय तक स्कूल से अनुपस्थित रहने के आरोपों की जांच कर संबंधित शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। हालांकि, शिक्षक रामपत यादव और जिला शिक्षा अधिकारी का पक्ष इस मामले में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में केवल दोबारा आदेश जारी करने तक सीमित रहता है या आदेश के पालन में हुई देरी और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के मामले में जिम्मेदारी भी तय करता है।