धान खरीदी से पहले किसानों की मांगों को लेकर AAP का सरकार पर दबाव, 3508 रुपये प्रति क्विंटल देने की मांग

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से प्रस्तावित धान खरीदी से पहले आम आदमी पार्टी ने किसानों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पार्टी ने धान का मूल्य 3508 रुपये प्रति क्विंटल करने, बारिश से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने, रकबा संशोधन में किसानों की सहमति अनिवार्य करने और बायोमेट्रिक की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है।

Oct 30, 2026 - 10:35
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धान खरीदी से पहले किसानों की मांगों को लेकर AAP का सरकार पर दबाव, 3508 रुपये प्रति क्विंटल देने की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने वाली है। इससे पहले आम आदमी पार्टी ने किसानों की समस्याओं और खरीदी प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को लेकर राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। पार्टी ने धान का मूल्य 3508 रुपये प्रति क्विंटल देने, बारिश से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने और धान खरीदी में बायोमेट्रिक की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशभर में किसानों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

29 अक्टूबर 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय, प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा, प्रदेश अध्यक्ष किसान विंग तारेंद्र चंद्राकर, प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी और कार्यकारी जिलाध्यक्ष रायपुर सागर क्षीरसागर ने कहा कि धान खरीदी की तैयारियों के बीच अनेक किसानों का पंजीयन और गिरदावरी संबंधी काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और राजस्व संबंधी कार्यों में देरी के कारण किसानों के सामने अपनी उपज बेचने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

आम आदमी पार्टी ने धान का मूल्य 3508 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। पार्टी का तर्क है कि केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वर्ष 2024-25 में 117 रुपये, 2025-26 में 69 रुपये और 2026-27 में 72 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इन तीन वर्षों की कुल 258 रुपये की वृद्धि को समर्थन मूल्य में जोड़ने की मांग की गई है। इसके साथ ही पार्टी ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की राजीव गांधी किसान न्याय योजना की कथित बकाया 150 रुपये प्रति क्विंटल की राशि देने की मांग भी उठाई है। पार्टी के अनुसार, राज्य सरकार के वर्तमान 3100 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य में इन राशियों को जोड़ने पर किसानों को 3508 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए।

पार्टी ने हालिया आकस्मिक बारिश से खड़ी फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। नेताओं ने मांग की कि प्रभावित किसानों की फसलों का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि मौसम की मार से परेशान किसानों को राहत मिल सके।

एक अन्य प्रमुख मांग रकबा संशोधन और रकबा समर्पण की प्रक्रिया को लेकर है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि फिलहाल ऐप के माध्यम से किसानों के रकबे में संशोधन और समर्पण की प्रक्रिया की जा रही है। पटवारियों की हड़ताल के बीच इस प्रक्रिया में तकनीकी और व्यावहारिक त्रुटियों की आशंका जताते हुए पार्टी ने मांग की कि किसान की स्पष्ट सहमति के बिना उसके खाते के रकबे में कोई बदलाव नहीं किया जाए। नेताओं ने कहा कि पिछले वर्ष भी रकबा संशोधन से जुड़ी विसंगतियों के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

पार्टी ने धान खरीदी में बायोमेट्रिक यानी अंगूठे के निशान की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की है। नेताओं का कहना है कि सर्वर और नेटवर्क की समस्या के साथ बुजुर्ग किसानों के फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने से खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए पूर्व की व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।

आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि यदि 3508 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान, फसल क्षति का मुआवजा और खरीदी प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।