बालोद के मेंढ़की में मां दुर्गा और जोत-जवारा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा, जसगीत और जयकारों से गूंजा गांव, विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

बालोद जिले के ग्राम मेंढ़की में विजयादशमी पर मां दुर्गा और जोत-जवारा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे, पारंपरिक जसगीत और माता के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद तालाब में प्रतिमा एवं जोत-जवारा का विसर्जन किया गया। नवरात्रि समापन पर आयोजित विशाल भंडारे में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण कर सामाजिक एकता का संदेश दिया।

Oct 22, 2026 - 08:41
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बालोद के मेंढ़की में मां दुर्गा और जोत-जवारा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा, जसगीत और जयकारों से गूंजा गांव, विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिले के ग्राम मेंढ़की में क्वांर नवरात्रि के समापन और विजयादशमी पर्व के अवसर पर मां दुर्गा एवं जोत-जवारा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। गाजे-बाजे, पारंपरिक जसगीत और माता रानी के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार और गांव की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।

जिला मुख्यालय बालोद से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित ग्राम मेंढ़की में विजयादशमी के अवसर पर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने अपने दैनिक कामकाज से समय निकालकर धार्मिक आयोजन में सामूहिक रूप से भाग लिया। घर-घर मां दुर्गा और जोत-जवारा की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने माता रानी को भावभीनी विदाई दी।

विसर्जन शोभायात्रा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सजाकर ट्रैक्टर में विराजित किया गया। ट्रैक्टर के आगे जोत-जवारा, डांग-डोरी और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ माता सेवा मंडली के सदस्य जसगीत गाते हुए चल रहे थे। माता रानी की भक्ति में लीन श्रद्धालु संगीत की धुन पर झूमते नजर आए। शोभायात्रा के दौरान जय माता दी के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठा।

इस दौरान कई श्रद्धालु धार्मिक आस्था और भक्ति में लीन होकर झूमने लगे। ग्राम के बैगा द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुम-धूप देकर उन्हें शांत कराया गया। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को गांव के विभिन्न मार्गों से भ्रमण कराते हुए तालाब तक पहुंचाया गया। श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर परिवार की खुशहाली और गांव की सुख-शांति की प्रार्थना की।

तालाब पहुंचने पर पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए मां दुर्गा की प्रतिमा एवं जोत-जवारा का विसर्जन किया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने माता रानी से अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना की।

विजयादशमी की सुबह ग्राम के बैगा और ग्रामीणों ने गांव में स्थापित देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना भी की। इस दौरान जोत-जवारा और श्रीफल अर्पित कर गांव में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की गई। धार्मिक परंपराओं के प्रति ग्रामीणों की आस्था इस आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

नवरात्रि पर्व के समापन अवसर पर ग्राम मेंढ़की में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। हनुमान मंदिर के सामने मंगलवार की रात महिला, पुरुष और बच्चों ने कतारबद्ध होकर एक साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए।

इस सामूहिक आयोजन की विशेष बात यह रही कि गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलाया गया। सभी ग्रामीणों ने एक स्थान पर एकत्रित होकर सामूहिक रूप से भोजन किया। इस परंपरा ने गांव में आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।

ग्राम मेंढ़की में आयोजित मां दुर्गा एवं जोत-जवारा विसर्जन कार्यक्रम ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। पारंपरिक जसगीत, माता सेवा मंडली की सहभागिता, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक भंडारे के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी आस्था व्यक्त की।

कुल मिलाकर, ग्राम मेंढ़की में विजयादशमी और नवरात्रि पर्व का समापन श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। मां दुर्गा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा और सामूहिक भंडारे ने गांव में सामाजिक एकता, सहयोग और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया।