शिवधाम कोड़िया में दशहरा महोत्सव की धूम, रामलीला में राम-रावण युद्ध का भव्य मंचन, आतिशबाजी के बीच रावण दहन और तीन पुस्तकों का विमोचन
दुर्ग जिले के शिवधाम कोड़िया में दुर्गा दशहरा महोत्सव समिति द्वारा दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। डॉ. नीलकंठ देवांगन द्वारा स्थापित स्वर्ण शिखा नाट्य कला मंच के कलाकारों ने अंगद-रावण संवाद, मेघनाथ-लक्ष्मण युद्ध, कुंभकरण वध और राम-रावण युद्ध का मंचन किया। इसके बाद आतिशबाजी के बीच विशाल रावण पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. नीलकंठ देवांगन की तीन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। मुख्य अतिथि भूपेंद्र साहू, कार्यक्रम की अध्यक्ष जानकी साहू और विशेष अतिथि प्रदीप साहू ने बुराई तथा अहंकार को त्यागने का संदेश दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. लोकेश्वर सिंह ठाकुर, दुर्ग l जिले के शिवधाम कोड़िया में विजयादशमी के पावन अवसर पर दुर्गा दशहरा महोत्सव समिति द्वारा दशहरा उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आकर्षक मंचन किया गया। भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध के दृश्य प्रस्तुत करने के बाद विशाल रावण पुतले का आतिशबाजी के साथ दहन किया गया। आयोजन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अहंकार पर विनम्रता की विजय का संदेश दिया गया।
दशहरा महोत्सव के अंतर्गत डॉ. नीलकंठ देवांगन द्वारा स्थापित स्वर्ण शिखा नाट्य कला मंच के कलाकारों ने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों की नाट्य प्रस्तुतियां दीं। रामलीला में अंगद-रावण संवाद, मेघनाथ-लक्ष्मण युद्ध, कुंभकरण वध और भगवान श्रीराम तथा रावण के बीच अंतिम युद्ध का मंचन किया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने रामायण की धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षाओं को दर्शकों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
रामलीला के दौरान अंगद और रावण के बीच संवाद के माध्यम से अहंकार और धर्म के संघर्ष को दर्शाया गया। वहीं मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच युद्ध तथा कुंभकरण वध के प्रसंगों ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाया। भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध के मंचन के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन को विशेष बनाया।
रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के मंचन के बाद दशहरा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण विशाल रावण पुतले का दहन रहा। आतिशबाजी के बीच रावण दहन के साथ विजयादशमी पर्व मनाया गया। यह आयोजन भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला रहा।
इस अवसर पर साहित्य और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष पुस्तक विमोचन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. नीलकंठ देवांगन द्वारा लिखित तीन पुस्तकों का अतिथियों के हाथों विमोचन किया गया। इनमें 'दशहरे की रामलीला : अहंकार का अग्निपथ', 'जिन्दगी बढ़त गिस : अन्तस के पीरा' और 'छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल' शामिल हैं। इन पुस्तकों के विमोचन के माध्यम से साहित्यिक रचनाओं के साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खेलों को महत्व दिया गया।
पुस्तक विमोचन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य भूपेंद्र साहू उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत की सरपंच जानकी साहू ने की। वहीं प्रदीप साहू विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। अतिथियों ने डॉ. नीलकंठ देवांगन के साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि विजयादशमी का पर्व केवल रावण के पुतले का दहन करने का अवसर नहीं है, बल्कि अपने भीतर छिपी बुराइयों और अहंकार को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने समाज में सत्य, सदाचार, विनम्रता और आपसी भाईचारे के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
शिवधाम कोड़िया में आयोजित दशहरा महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ साहित्य, कला और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम बना। रामलीला के मंचन से जहां भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश मिला, वहीं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के माध्यम से साहित्य और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति को प्रोत्साहन मिला।
कुल मिलाकर, दुर्गा दशहरा महोत्सव समिति और स्वर्ण शिखा नाट्य कला मंच के संयुक्त प्रयासों से शिवधाम कोड़िया में दशहरा पर्व उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने समाज को बुराई और अहंकार का त्याग कर सत्य, धर्म और सद्भाव के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।