संग्रहण केंद्रों में लाखों मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा, सरकार पर लापरवाही का आरोप

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने आरोप लगाया है कि राज्य के संग्रहण केंद्रों में पिछले सीजन का लगभग 15 लाख मीट्रिक टन धान अब भी खुले में पड़ा है और बारिश से प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस ने धान के समय पर निस्तारण नहीं होने को लेकर राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

Aug 6, 2026 - 14:07
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संग्रहण केंद्रों में लाखों मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा, सरकार पर लापरवाही का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में धान के भंडारण और निस्तारण को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार की कथित लापरवाही के कारण पिछले सीजन का लगभग 15 लाख मीट्रिक टन धान अब भी विभिन्न संग्रहण केंद्रों में खुले में पड़ा हुआ है। उनका दावा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण यह धान खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के बाद उसके समय पर निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि धान लंबे समय तक खुले में पड़ा रहेगा तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी और इससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि राज्य में "डबल इंजन" की सरकार है, तो केंद्र सरकार से समन्वय कर समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार चावल को केंद्रीय पूल में शामिल कराया जाना चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि इससे राज्य को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है और धान के निस्तारण की समस्या का समाधान भी हो सकता है।

वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि धान खुले में पड़े रहने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में यदि धान खराब होता है तो इसके लिए प्राकृतिक कारणों को आधार बनाकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा सकता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार पूरा चावल नहीं खरीदे जाने के कारण राज्य सरकार के सामने भंडारण और निस्तारण की समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने में सफल नहीं रही।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास किया। कांग्रेस के अनुसार, परिवहन और अन्य खर्चों को जोड़ने पर धान की लागत लगभग 3,822 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है, जबकि कथित रूप से इसे कम आधार मूल्य पर नीलाम करने की कोशिश की गई। कांग्रेस का दावा है कि इसके बावजूद पूरा धान नीलाम नहीं हो सका और बड़ी मात्रा में धान अब भी संग्रहण केंद्रों में पड़ा हुआ है।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए धान के सुरक्षित भंडारण और शीघ्र निस्तारण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि सार्वजनिक धन और किसानों की मेहनत दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।