बालक ने मांगी साइकिल, डॉ. वर्णिका शर्मा ने दो दिन में पूरा किया वादा
कवर्धा प्रवास के दौरान शासकीय बालक गृह के निरीक्षण में पहुंचीं छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने एक बालक से उसकी इच्छा जानी। जन्मदिन के उपहार के रूप में बालक ने साइकिल की इच्छा जताई। अध्यक्ष ने साइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसे दो दिन के भीतर पूरा कर दिया गया। बोड़ला के बाल विकास परियोजना अधिकारी नमन शर्मा ने बालक के साथ उसकी पसंद की साइकिल का चयन कराया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने 16 सितंबर 2026 को कवर्धा प्रवास के दौरान शासकीय बालक गृह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि बाल गृह में निवासरत एक बालक का जन्मदिन है। इस अवसर पर उन्होंने बालक के साथ उसका जन्मदिन मनाया और उससे आत्मीय संवाद करते हुए उसकी इच्छा तथा आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली।
जन्मदिन पर उपहार के संबंध में पूछे जाने पर बालक ने संकोच और उत्साह के साथ साइकिल की इच्छा व्यक्त की। बालक की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने उसे उसकी पसंद के अनुसार साइकिल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। अध्यक्ष के आश्वासन के बाद संबंधित अधिकारियों ने साइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की।
आश्वासन के अनुरूप महज दो दिन के भीतर बोड़ला, कवर्धा के बाल विकास परियोजना अधिकारी नमन शर्मा ने बालक को साथ लेकर उसकी पसंद की साइकिल का चयन कराया। इसके बाद साइकिल बालक गृह में बालक को उपलब्ध कराई गई। अपनी पसंद की साइकिल मिलने पर बालक के चेहरे पर खुशी देखने को मिली और उसने प्रसन्नता व्यक्त की।
साइकिल मिलने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बालक से दूरभाष के माध्यम से संवाद किया। बातचीत के दौरान बालक ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। इस पहल के माध्यम से बालक की इच्छा को महत्व देने के साथ उसके सहभागिता के अधिकार को भी प्राथमिकता दी गई।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल अधिकारों में बच्चों की सहभागिता का महत्वपूर्ण स्थान है। बच्चों की बात सुनना, उनकी भावनाओं और इच्छाओं को महत्व देना तथा उनकी राय का सम्मान करना बाल अधिकार संरक्षण की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि बाल गृहों में रहने वाले बच्चों को केवल संरक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास, भावनात्मक आवश्यकताओं और सहभागिता के अधिकार को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों की छोटी-छोटी इच्छाओं को समझना और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान देना उनके आत्मविश्वास तथा भावनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। बाल गृह में रहने वाले बच्चों के लिए ऐसा वातावरण जरूरी है, जहां वे अपनी बात सहजता से रख सकें और उनकी भावनाओं को सम्मान मिले।
इस पूरे घटनाक्रम में बालक की इच्छा को केंद्र में रखते हुए समयबद्ध तरीके से उसे उसकी पसंद की साइकिल उपलब्ध कराई गई। जन्मदिन के अवसर पर मिले इस मनपसंद उपहार से बालक खुश हुआ। आयोग की पहल ने यह संदेश दिया कि बाल संरक्षण का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षा और सुविधाएं देने के साथ-साथ उनकी इच्छाओं, भावनाओं और अधिकारों को सम्मान देना भी है।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनकी राय को महत्व दिया जाना चाहिए। बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनके अधिकारों की रक्षा, भावनात्मक जरूरतों की समझ और सकारात्मक सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।