कवर्धा: अशोका पब्लिक स्कूल में सकारात्मक अभिभावकत्व कार्यशाला, बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिए सफलता के सूत्र
कवर्धा के अशोका पब्लिक स्कूल में सकारात्मक अभिभावकत्व कार्यशाला एवं पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षा विशेषज्ञ और पेरेंटिंग कोच डॉ. कीर्तिभूषण वर्मा ने मोबाइल की बढ़ती आदत, बच्चों के व्यवहार, अनुशासन, पढ़ाई में रुचि और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनने और उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया। विद्यालय के संचालक पवन देवांगन और संचालिका सारिका देवांगन ने परिवार तथा विद्यालय के आपसी सहयोग को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूरी बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए अच्छी शिक्षा के साथ सही परवरिश, अच्छे संस्कार और परिवार एवं विद्यालय के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से कवर्धा स्थित अशोका पब्लिक स्कूल में सकारात्मक अभिभावकत्व कार्यशाला एवं पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों को समझने, उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने और पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने के महत्वपूर्ण तरीके बताए गए।
कार्यशाला में शिक्षा विशेषज्ञ एवं पेरेंटिंग कोच डॉ. कीर्तिभूषण वर्मा ने अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए बच्चों के पालन-पोषण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल, बच्चों के व्यवहार, अनुशासन, पढ़ाई में रुचि और आत्मविश्वास जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास में घर और स्कूल दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए बच्चों को समझने और उनकी भावनाओं को महत्व देने की जरूरत है।
बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनना जरूरी
डॉ. कीर्तिभूषण वर्मा ने कहा कि बच्चों की गलतियों पर केवल डांटना या उन पर दबाव बनाना समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय अभिभावकों को बच्चों की बात ध्यान से सुननी चाहिए, उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें सीखने के बेहतर अवसर देने चाहिए। जब बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी परेशानियों को परिवार के साथ साझा करने में अधिक सहज महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने शिक्षकों को भी आत्ममूल्यांकन करने और अपनी शिक्षण पद्धति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करने की सीख दी। उनके अनुसार, बच्चों के सामने अभिभावकों और शिक्षकों का व्यवहार एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसलिए बच्चों से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा करने के साथ बड़ों को भी अपने आचरण में सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए।
गृहकार्य से अधिक समझकर सीखने पर जोर
कार्यशाला के दौरान पढ़ाई के तरीके पर भी चर्चा की गई। डॉ. वर्मा ने गृहकार्य पूरा करने की औपचारिकता से आगे बढ़कर विषयों को समझने और सीखने की आदत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना भी है। मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों को पढ़ाई, खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए संतुलित समय देना भी महत्वपूर्ण है।
परिवार और विद्यालय के सहयोग से बनेगा बेहतर भविष्य
विद्यालय के संचालक पवन देवांगन ने निरंतर सीखते रहने को सफलता का आधार बताया। वहीं, विद्यालय की संचालिका सारिका देवांगन ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार और विद्यालय के बीच आपसी सहयोग बेहद जरूरी है। जब अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों की जरूरतों, उनकी क्षमताओं और चुनौतियों को समझते हैं, तो उनके विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है।
कार्यशाला ने अभिभावकों और शिक्षकों को यह संदेश दिया कि बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने की शुरुआत स्वयं के व्यवहार में सुधार से होती है। सही परवरिश, अच्छे संस्कार, संवाद और सहयोग से बच्चों को आत्मविश्वासी एवं जिम्मेदार बनाने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को जागरूक करना तथा उनके बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना रहा।