अशोका पब्लिक स्कूल में सकारात्मक परवरिश की पाठशाला, अभिभावकों और शिक्षकों ने सीखे सफलता के सूत्र
कवर्धा के अशोका पब्लिक स्कूल में 11 अक्टूबर को सकारात्मक अभिभावकत्व कार्यशाला एवं पालक-शिक्षक बैठक आयोजित की गई। शिक्षा विशेषज्ञ और पेरेंटिंग कोच डॉ. कीर्तिभूषण वर्मा ने मोबाइल की आदत, बच्चों के व्यवहार, अनुशासन, पढ़ाई में रुचि, आत्मविश्वास और किशोरावस्था से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनने और समझकर सीखने के अवसर देने पर जोर दिया। विद्यालय के संचालक पवन देवांगन और संचालिका सारिका देवांगन ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार और विद्यालय के आपसी सहयोग को आवश्यक बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l बच्चों का बेहतर भविष्य केवल अच्छी पढ़ाई से नहीं, बल्कि सही परवरिश, अच्छे संस्कार, अनुशासन और परिवार व विद्यालय के आपसी सहयोग से बनता है। इसी उद्देश्य से अशोका पब्लिक स्कूल, कवर्धा में 11 अक्टूबर को सकारात्मक अभिभावकत्व कार्यशाला एवं पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा विशेषज्ञ एवं पेरेंटिंग कोच डॉ. कीर्तिभूषण वर्मा ने बच्चों की परवरिश, व्यवहार, पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। विद्यालय के संचालक पवन देवांगन और संचालिका सारिका देवांगन ने पुष्पगुच्छ भेंटकर डॉ. वर्मा का स्वागत किया। शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय संचालन के साथ पेरेंटिंग कोच, करियर काउंसलर, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय डॉ. वर्मा ने अभिभावकों एवं शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों को समझने और उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के तरीके बताए।
बच्चों को समझें, केवल डांटें नहीं
कार्यशाला में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल, बच्चों की जिद, गुस्सा, पढ़ाई में मन नहीं लगना, आत्मविश्वास की कमी, भाई-बहनों के बीच झगड़े और किशोरावस्था में होने वाले बदलावों पर चर्चा की गई। डॉ. वर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता और व्यवहार अलग होता है। ऐसे में बच्चों की तुलना करने या उन्हें बार-बार डांटने के बजाय उनकी बात सुनना, समस्याओं को समझना और उनसे संवाद करना जरूरी है।
उन्होंने शांत रहने वाले और पढ़ाई में पीछे रहने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, बच्चों को प्रोत्साहन और सहयोग मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। अभिभावकों को भी बच्चों के सामने अपने व्यवहार और मोबाइल के इस्तेमाल में संयम रखने की सीख दी गई, क्योंकि बच्चे बड़ों के आचरण से भी बहुत कुछ सीखते हैं।
गृहकार्य नहीं, गृह-अधिगम पर जोर
डॉ. वर्मा ने शिक्षकों को नियमित आत्ममूल्यांकन, अनुशासन और निरंतर प्रशिक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि बच्चों को ध्यानपूर्वक सुनना भी आवश्यक है। कार्यशाला में गृहकार्य पूरा करने की औपचारिकता के बजाय विषयों को समझकर सीखने पर जोर दिया गया। कहानियों, पढ़ने-बोलने के अभ्यास और लेखन के माध्यम से बच्चों के भाषा विकास को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।
बच्चों में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने के लिए “YES, I CAN” यानी “हां, मैं कर सकता हूं” का संदेश दिया गया। डॉ. वर्मा ने अभिभावकों और शिक्षकों को प्रेरित किया कि दूसरों में बदलाव की अपेक्षा करने से पहले स्वयं के व्यवहार में सुधार करें और प्रतिदिन अपने विकास का आकलन करें।
परिवार और विद्यालय के सहयोग से संवरेगा भविष्य
विद्यालय के संचालक पवन देवांगन ने डॉ. वर्मा के ज्ञान और अनुभव की सराहना करते हुए कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चों के व्यवहार, संस्कार और मानसिक विकास के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वयं भी सीखते रहना चाहिए।
वहीं, संचालिका सारिका देवांगन ने कार्यशाला और पालक-शिक्षक बैठक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए अभिभावकों एवं शिक्षकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए परिवार और विद्यालय के बीच बेहतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यालय के शिक्षकों ने भी भाग लेकर बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़े सुझाव प्राप्त किए। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए परिवार, विद्यालय और समाज को मिलकर सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा।