प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी तारकेश्वर पटेल से मुलाकात कर अपनी शिकायत और मांगों से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने कहा कि राजधानी रायपुर में सामाजिक सौहार्द, भाईचारा और कौमी एकता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं नफरत फैलाने वाली बातों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि स्कूल शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है और बच्चों के बीच आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सामाजिक सद्भाव एवं संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मामले में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर स्कूल प्रबंधन, प्राचार्य तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भोजराज गौरखेड़े, प्रदेश सचिव शैलेश बड़गे, विजय गजघाटे, जिला अध्यक्ष अरुण बागड़े, अविनाश ठुल और अरुण राव सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज रायपुर के जिला अध्यक्ष मनोज बंजारे, गणेश सेहतोड़े, नीरज बंजारे और अनिल कोसले भी मौजूद रहे।
क्रिश्चियन समाज की ओर से सुरेश मासी, रविका मसीह सहित अन्य प्रतिनिधि पहुंचे। जैनब तंजिम की जिला अध्यक्ष हाजरुन खान तथा ब्राह्मण समाज से ललित मिश्रा और आभा मुरलिया मुदलियार सहित अन्य प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
हुसैनी सेना के जिला अध्यक्ष मोहम्मद आमिर खान ने कहा कि विभिन्न समाजों के लोग सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को बनाए रखने के उद्देश्य से एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसी भी प्रकार के विवाद और वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
हुसैनी सेना के प्रदेश महामंत्री मोहम्मद जाकिर और प्रवक्ता साजिद कुरैशी ने कहा कि बच्चे देश और प्रदेश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों को संविधान, समानता और सामाजिक एकता के मूल्यों की जानकारी मिलनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रदेश में शांति, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को बनाए रखना है। मामले में प्रशासन द्वारा जांच और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की मांग की गई।