62 साल की उम्र में सुनीता सिंह ने जीता गोल्ड मेडल, छत्तीसगढ़ का बढ़ाया मान
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मझगवां स्थित फोर्स एकेडमी की कोच सुनीता सिंह ने 62 वर्ष की उम्र में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित 5वीं वेटरंस स्पोर्ट्स एंड गेम्स नेशनल चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। उनकी सफलता पर फोर्स एकेडमी में सम्मान समारोह आयोजित कर बधाई दी गई। सुनीता सिंह की उपलब्धि खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, मरवाही l कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो उम्र कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। इस बात को सच साबित किया है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मझगवां स्थित फोर्स एकेडमी की कोच सुनीता सिंह ने। 62 वर्ष की उम्र में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान भी बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित नेहरू स्टेडियम में 7 से 11 अक्टूबर 2026 तक आयोजित 5वीं वेटरंस स्पोर्ट्स एंड गेम्स नेशनल चैंपियनशिप 2026 में सुनीता सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में उनकी सफलता ने यह संदेश दिया कि खेल के प्रति समर्पण, नियमित अभ्यास और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
प्रतियोगिता से वापस लौटने पर फोर्स एकेडमी मझगवां परिसर में सुनीता सिंह का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया। इस अवसर पर एकेडमी के समन्वयक लालजी पड़वार, मुख्य कोच पंचलाल लहरे, जो पूर्व आर्मी कर्मी हैं, कोच बलदाऊ, गुमान सिंह, रवि सिंह और वसीम खान सहित अन्य प्रशिक्षकों एवं खिलाड़ियों ने उन्हें बधाई दी। सभी ने उनकी उपलब्धि को एकेडमी और पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताया।
फोर्स एकेडमी के संस्थापक डॉ. लाल उमेद सिंह, आईपीएस, ने भी सुनीता सिंह की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनकी उपलब्धि को खेल के प्रति समर्पण और निरंतर मेहनत का प्रेरक उदाहरण माना। एकेडमी में उनके सम्मान से खिलाड़ियों के बीच उत्साह देखने को मिला।
सुनीता सिंह लंबे समय से फोर्स एकेडमी में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं। वह बच्चों और युवाओं को अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, नियमित अभ्यास और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का महत्व सिखाती हैं। ऐसे में 62 वर्ष की उम्र में खुद राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करना उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ-साथ प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का विषय है।
सुनीता सिंह की यह सफलता उन सभी लोगों के लिए संदेश है, जो उम्र बढ़ने के साथ अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा और मेहनत किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की इस उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। फोर्स एकेडमी मझगवां में उनके सम्मान के साथ उनकी सफलता का उत्सव मनाया गया। सुनीता सिंह की उपलब्धि खेल जगत में प्रेरणा का उदाहरण बनकर उभरी है और युवाओं को अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने का संदेश देती है।