बलरामपुर में PDS चावल में मिले कंकड़-पत्थर, 502 हितग्राहियों की राशन व्यवस्था पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ब्लॉक के खड़ियाडामर गांव की शासकीय उचित मूल्य दुकान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल में कंकड़-पत्थर मिलने का मामला सामने आया है। बताया गया कि इस दुकान से 502 हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरित किया जाना है और चावल की आपूर्ति दीप राइस मिल, बलरामपुर से हुई थी। ग्रामीणों ने खराब गुणवत्ता वाले चावल को लेने से इनकार करने की बात कही। जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव ने मौके पर पहुंचकर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से फोन पर चर्चा की। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने भी दुकान पहुंचकर चावल का निरीक्षण किया और खराब चावल वापस करने की बात कही। इस मामले ने राशन की गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बलरामपुर ब्लॉक के खड़ियाडामर गांव स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में चावल के साथ कंकड़-पत्थर मिलने का मामला सामने आया है। इस दुकान से 502 हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरित किया जाना है। चावल में गंदगी और पत्थर मिलने की शिकायत के बाद ग्रामीणों ने राशन लेने से इनकार करने का निर्णय लिया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद खाद्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और चावल का निरीक्षण किया।
जानकारी के अनुसार, खड़ियाडामर गांव की उचित मूल्य दुकान में वितरित किए जाने वाले चावल की आपूर्ति दीप राइस मिल, बलरामपुर से की गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि चावल में कंकड़-पत्थर मिलने से उन्हें गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है। राशन लेने पहुंचे लोगों ने चावल की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई और इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों की शिकायत के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
मामले की जानकारी मिलने पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति की जानकारी लेते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल से दूरभाष पर चर्चा की और पूरे प्रकरण से अवगत कराया। बताया गया कि खाद्य मंत्री ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, खाद्य विभाग के अधिकारियों ने भी उचित मूल्य दुकान पहुंचकर चावल का अवलोकन किया। अधिकारियों की ओर से खराब गुणवत्ता वाले चावल को वापस करने की बात कही गई है।
इस घटना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी राशन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में राशन दुकान तक पहुंचने वाले चावल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। नागरिक आपूर्ति निगम और संबंधित विभागों की व्यवस्था में खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच के प्रावधान हैं। इसके बावजूद चावल में कंकड़-पत्थर मिलने की शिकायत सामने आना जांच प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लंबे समय से खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में सरकारी राशन की गुणवत्ता को लेकर सामने आने वाली शिकायतें व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें शासन की ओर से मिलने वाले राशन में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल इस मामले में चावल की गुणवत्ता, आपूर्ति प्रक्रिया और जांच व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करना महत्वपूर्ण होगा। खाद्य विभाग की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चावल में कंकड़-पत्थर कैसे पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण राशन उपलब्ध कराना और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करना प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है।