कवर्धा में ‘अब दो नहीं चार’ अभियान से स्वच्छता का संदेश, चार श्रेणियों में करना होगा कचरे का पृथक्करण

कवर्धा नगर पालिका परिषद ने सेवा संकल्प अभियान के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में कचरा पृथक्करण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया। ‘अब दो नहीं चार’ संदेश के माध्यम से नागरिकों को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के दौरान चार रंगों के डस्टबिन के उपयोग और कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी गई। नगर पालिका ने नागरिकों से स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

Oct 15, 2026 - 18:18
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कवर्धा में ‘अब दो नहीं चार’ अभियान से स्वच्छता का संदेश, चार श्रेणियों में करना होगा कचरे का पृथक्करण

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। नगर पालिका परिषद कवर्धा द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शहर के विभिन्न वार्डों में स्वच्छता और कचरा पृथक्करण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाया गया। ‘अब दो नहीं चार’ संदेश के माध्यम से नागरिकों को घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान का उद्देश्य कचरे के उचित संग्रहण, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान को बढ़ावा देना है, ताकि शहर की स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

अभियान के दौरान नागरिकों को बताया गया कि केवल गीले और सूखे कचरे को अलग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सैनिटरी अपशिष्ट और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट को भी अलग रखना आवश्यक है। नगर पालिका के स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक होमेश मानिकपुरी और स्वच्छता दीदियों ने विभिन्न वार्डों में लोगों को कचरे की पहचान, उसके पृथक्करण और निर्धारित डस्टबिन के उपयोग के बारे में जानकारी दी। नागरिकों को घर पर ही कचरे को अलग-अलग रखने की आदत अपनाने के लिए जागरूक किया गया।

जनजागरूकता अभियान में चार रंगों के डस्टबिन के महत्व को विस्तार से समझाया गया। हरे रंग के डस्टबिन में रसोई से निकलने वाला गीला कचरा, सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, फूल-पत्तियां और चायपत्ती रखी जाती है। इस कचरे का उपयोग कम्पोस्टिंग और बायो-मेथनेशन जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से उपयोगी संसाधन बनाने में किया जा सकता है। नीले रंग के डस्टबिन में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच की बोतलें, धातु, रबर और कपड़े जैसी सूखी सामग्री रखी जाती है, जिससे पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होती है।

इसी प्रकार लाल रंग के डस्टबिन में इस्तेमाल किए गए सैनिटरी नैपकिन, डायपर, पट्टी और बैंडेज जैसे सैनिटरी अपशिष्ट को अलग रखने की जानकारी दी गई। वहीं, बैंगनी रंग के डस्टबिन का उपयोग विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट के लिए बताया गया, जिसमें दवाइयां, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बल्ब, पेंट के डिब्बे और कीटनाशक या रसायनों के कंटेनर जैसी सामग्री शामिल हो सकती है। ऐसे अपशिष्ट को मान्य कचरे में मिलाने के बजाय संबंधित निर्धारित संग्रहण और सुरक्षित निपटान व्यवस्था के अनुसार देना चाहिए।

अभियान के दौरान लोगों को समझाया गया कि अलग-अलग प्रकार के कचरे को मिलाकर देने से पुनर्चक्रण प्रभावित होता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ती है। स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण करने से गीले कचरे से खाद बनाने, सूखी सामग्री का पुनर्चक्रण करने और अन्य अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान करने में मदद मिलती है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता महत्वपूर्ण है।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी नारायण साहू ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित श्रेणियों में अलग करके ही दें। उन्होंने स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहयोग करने का आग्रह किया। नगर पालिका का मानना है कि जनभागीदारी से ही कवर्धा को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।