दरअसल, 19 सितंबर को हरदीबाजार, रेंकी और सराई सिंगार के भूविस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में दीपका महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य गेट पर करीब आठ घंटे तक तालाबंदी आंदोलन किया था। इस दौरान एसडीएम कटघोरा नितिन दुबे और दीपका जीएम के साथ तीन दौर की वार्ता हुई थी। बातचीत के बाद एसईसीएल बिलासपुर मुख्यालय में 21 सितंबर को बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी थी, जिसके बाद शाम करीब 5 बजे आंदोलन स्थगित किया गया।
इसी क्रम में सोमवार को बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी सभागार में बैठक आयोजित हुई। इसमें एसईसीएल की ओर से डायरेक्टर डीएचआर वीरंची दास, डीटी डायरेक्टर पीएनपी मोहपात्रा, जीएम एलएंडआर बिपिन कुमार लाल, दीपका जीएम अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विधायक प्रेमचंद पटेल के साथ हरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर और बड़ी संख्या में भूविस्थापित बैठक में शामिल हुए।
बैठक में बसाहट के मुद्दे पर चर्चा करते हुए सुपेत पारा बाईपास किनारे उतरदा की जमीन पर बसाहट को लेकर सहमति नहीं बन सकी। भूविस्थापितों की ओर से जयंती नगर को ही पूर्ण रूप से विकसित कर बसाहट देने की मांग रखी गई। इसके अलावा वर्ष 2004 से 2010 के बीच हुए अधिग्रहण के बाद जमीन की खरीदी-बिक्री के मामलों में मकान मालिकों को सोलसियम सहित मुआवजा देने की मांग पर भी चर्चा हुई।
बैठक में ड्रोन सर्वे के बाद बनाए गए मकानों को नया मानकर 60 प्रतिशत कटौती और 40 प्रतिशत मुआवजा निर्धारित किए जाने के मुद्दे को भी उठाया गया। भूविस्थापितों ने ऐसे मकानों के लिए भी सोलसियम सहित मुआवजा देने की मांग रखी। वहीं वर्ष 2004 में अधिग्रहण के समय लागू व्यवस्था के अनुसार खाते के आधार पर नौकरी देने के विषय में एसईसीएल ने विचार कर जानकारी देने की बात कही।
शेष 212 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और वहां बसाहट देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही आमगांव दर्राखांचा, मलगांव और सुआभोडी के भूविस्थापितों के लंबित नौकरी, मुआवजा और बसाहट से जुड़े मामलों को 15 दिनों के भीतर पूरा करने पर सहमति बनी।
बैठक में तय हुआ कि अन्य मांगों पर भी एसईसीएल तत्काल विचार करेगा और करीब चार से पांच दिनों के भीतर सभी मुद्दों पर लिखित जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा। हरदीबाजार में मुआवजा प्रक्रिया के दौरान मकान नहीं तोड़े जाने की बात भी एसईसीएल अधिकारियों की ओर से कही गई।
बैठक में उप सरपंच रेखा जायसवाल सहित श्यामू जायसवाल, रघुराज सिंह उईके, नरेश टंडन, व्यास राठौर, महेंद्र राठौर, राजेश जायसवाल, शिव यादव, फिरोज खान, जगदीश अग्रवाल, अनिल टंडन, मन्नु राठौर, राजाराम राठौर, प्रदीप पांडेय, ममता ओग्रे, प्रेम डिक्सेना, शशीधर सोनी, सुरेंद्र राठौर, प्रदीप राठौर, इंद्रभूषण ओढ़े, सुधीर कंवर, चंद्रिका प्रजापति, दिलीप राठौर, कमलेश राठौर, पंकज धुर्वा, रमन कुल्हाड़े और गणेश श्रीवास समेत बड़ी संख्या में भूविस्थापित मौजूद रहे।