CSMCL कथित घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

सुप्रीम कोर्ट ने CSMCL से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन मामले में कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने शर्त रखी है कि जमानत अवधि के दौरान वे छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और अपना पता व संपर्क विवरण जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराएंगे।

Aug 6, 2026 - 12:43
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CSMCL कथित घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर को अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी निर्धारित की हैं। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि जमानत अवधि के दौरान अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे और अपने निवास का पता तथा संपर्क नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे।

मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि जमानत मिलने की स्थिति में आरोपी को छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जमानत की शर्तों में इसे शामिल किया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनवर ढेबर को ट्रायल के दौरान आवश्यकतानुसार संबंधित अदालत में उपस्थित होना होगा। साथ ही उन्हें अपने राज्य से बाहर के निवास का पूरा विवरण और मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों को देना होगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे संपर्क किया जा सके।

सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ शासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की।

इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 13 मई 2026 को अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य राज्य सरकार के निगम के भीतर एक व्यवस्थित भ्रष्टाचार तंत्र की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति के होते हैं और उनका व्यापक प्रभाव पड़ता है।

अभियोजन के अनुसार, जांच में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनसे यह संकेत मिलता है कि CSMCL के भीतर कार्यरत कुछ मैनपावर सप्लाई एजेंसियों को अपने वैध बिलों और बकाया भुगतान की स्वीकृति के लिए कथित रूप से अवैध कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था। आरोप है कि यह राशि कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी।

इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की जा रही है। प्रकरण भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत से अनवर ढेबर को अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, मामले की सुनवाई और जांच जारी रहेगी तथा आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।