विश्व धरोहर बनने की ओर सिरपुर का ऐतिहासिक कदम, यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और सुरंग टीला जैसे प्राचीन स्मारकों के लिए प्रसिद्ध सिरपुर में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं बढ़ेंगी।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है। लगभग डेढ़ हजार वर्षों के गौरवशाली इतिहास को समेटे सिरपुर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों और धार्मिक सहिष्णुता की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सिरपुर की इस उपलब्धि से प्रदेश में सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण कर इनके संरक्षण और विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों पर जोर दिया था।
प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध सिरपुर दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है। पाण्डुवंशी शासकों के शासनकाल में यह नगर राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल में यहां अनेक मंदिरों, बौद्ध विहारों और अन्य संरचनाओं का निर्माण हुआ। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी। सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन धार्मिक परंपराओं का ऐतिहासिक सहअस्तित्व है।
सिरपुर का विश्वप्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय ईंट स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। लगभग सातवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का निर्माण रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था। मंदिर की कलात्मक नक्काशी, आकर्षक प्रवेश द्वार और भगवान विष्णु से संबंधित मूर्तियां तत्कालीन शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा को दर्शाती हैं। इसके अतिरिक्त गंधेश्वर महादेव मंदिर, सुरंग टीला और प्राचीन राम मंदिर भी सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को विशेष महत्व प्रदान करते हैं।
सिरपुर प्राचीन भारत में बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। यहां आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार और तीवरदेव महाविहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इन स्थलों पर भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं, भिक्षुओं के आवासीय कक्ष और उत्कृष्ट स्थापत्य कला के प्रमाण मौजूद हैं। विभिन्न पुरातात्विक उत्खननों में दो हजार से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें धातु प्रतिमाएं, प्राचीन सिक्के, मिट्टी के पात्र, आभूषण और अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं।
सिरपुर को यूनेस्को की अस्थायी सूची में स्थान मिलने से पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे देश-विदेश के पर्यटकों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि अस्थायी सूची में शामिल होना अंतिम विश्व धरोहर दर्जा प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह नामांकन प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है।
छत्तीसगढ़ की यह प्राचीन सांस्कृतिक नगरी अपनी ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक सद्भाव और अद्भुत स्थापत्य कला के कारण विशेष पहचान रखती है। सिरपुर की वैश्विक पहचान मजबूत होने से प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।