शहीद गुंडाधुर की धरती पर बदलाव की नई कहानी, सुरक्षा कैंप बन रहे सेवा डेरा

बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कैंपों को जनसुविधा केंद्र यानी शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 70 कैंपों को सेवा डेरा बनाने की योजना है। यहां ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं, बैंकिंग, प्रमाण पत्र, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। महिला स्व-सहायता समूह इमली प्रसंस्करण, पारंपरिक चावल उत्पादन और सिलाई जैसे कार्यों से आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Oct 26, 2026 - 18:02
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शहीद गुंडाधुर की धरती पर बदलाव की नई कहानी, सुरक्षा कैंप बन रहे सेवा डेरा

UNITED NEWS OF ASIA. बस्तर।कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी सुविधाओं से दूर रहे बस्तर के गांवों में विकास और जनसेवा की नई पहल की जा रही है। सुरक्षा कैंपों को अब केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित न रखकर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं से जोड़ने वाले केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल के तहत लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में 70 कैंपों को सेवा डेरा में बदलने का काम किया जा रहा है।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ता बस्तर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दे रही है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से दूरदराज के गांवों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कृषि, पशुपालन और सिंचाई से संबंधित योजनाओं के जरिए ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

सेवा डेरा बना जनसुविधाओं का केंद्र

विशेष लेख के अनुसार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को बस्तर जिले के नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। नेतानार शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मस्थली है। उन्होंने वर्ष 1910 के भूमकाल विद्रोह में आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था। इसी ऐतिहासिक भूमि पर स्थापित सेवा डेरा अब ग्रामीणों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

पहले ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, बैंक खाता खुलवाने और आय, जाति तथा निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए दूर जाना पड़ता था। सेवा डेरा के माध्यम से आधार पंजीयन एवं संशोधन, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक करने और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

बैंकिंग और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा

सेवा डेरों में महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को पैसे निकालने, जमा करने और बैंकिंग संबंधी अन्य सुविधाएं गांव के पास उपलब्ध हो सकती हैं। स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा जैसी सेवाओं को सुलभ बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल

नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर इमली पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के अनुसार, इस कार्य से जुड़कर महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार करने और उसकी बिक्री से भी महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है। इसके साथ ही सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

इन उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर बनाने के लिए अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की टीम ने नेतानार पहुंचकर स्थानीय गतिविधियों का जायजा लिया। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम करना है।

सुरक्षा कैंपों से सेवा डेरा तक की यह पहल बस्तर में जनसुविधाओं के विस्तार, ग्रामीण आजीविका और महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देने का प्रयास है। डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग और स्थानीय उत्पादों के विपणन को एक मंच पर लाकर दूरस्थ गांवों के लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।