सहसपुर में शारदीय नवरात्र की पंचमी पर राजपरिवार की परंपरा का निर्वहन, ग्राम भ्रमण में उमड़ा जनसमूह

सहसपुर में शारदीय नवरात्र की पंचमी पारंपरिक हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। वर्षों से चली आ रही राजपरिवार की परंपरा के अनुसार कुल देवी-देवताओं और पूर्वजों की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद शाम को राजा ने क्षेत्रवासियों के साथ ग्राम भ्रमण किया। आयोजन में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। यह परंपरा स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और राजपरिवार तथा क्षेत्रवासियों के बीच पीढ़ियों से चले आ रहे आत्मीय संबंधों का प्रतीक है।

Oct 17, 2026 - 13:04
 0  2
सहसपुर में शारदीय नवरात्र की पंचमी पर राजपरिवार की परंपरा का निर्वहन, ग्राम भ्रमण में उमड़ा जनसमूह

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l शारदीय नवरात्र की पंचमी के अवसर पर सहसपुर में वर्षों से चली आ रही राजपरिवार की पारंपरिक परंपरा श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ निभाई गई। इस धार्मिक आयोजन में राजपरिवार के साथ क्षेत्रवासियों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। पूजा-अर्चना और ग्राम भ्रमण के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक एकता की परंपरा को जीवंत रखा गया।

सहसपुर में नवरात्र की पंचमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस अवसर पर राजपरिवार द्वारा पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार कुल देवी-देवताओं और पूर्वजों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पंचमी के दिन दिन में पूजा का आयोजन किया गया। धार्मिक विधियों के साथ क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना की गई। साथ ही क्षेत्रवासियों के कल्याण और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई।

पूजा-अर्चना के दौरान परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया गया। स्थानीय लोगों के लिए यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का भी माध्यम है। सहसपुर में लंबे समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है।

धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद शाम को राजा ने क्षेत्रवासियों के साथ ग्राम भ्रमण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी शामिल हुए। ग्राम भ्रमण के दौरान पूरे क्षेत्र में पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल नजर आया। लोगों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया। यह आयोजन राजपरिवार और आमजन के बीच आत्मीय संबंधों को दर्शाने के साथ सामाजिक सहभागिता का संदेश भी देता है।

सहसपुर में शारदीय नवरात्र की पंचमी से जुड़ी यह परंपरा स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपने रीति-रिवाजों, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ने का अवसर मिलता है। कुल देवी-देवताओं की पूजा और पूर्वजों का स्मरण भारतीय पारंपरिक जीवन में विशेष स्थान रखता है। सहसपुर में इसका निर्वहन स्थानीय आस्था को मजबूत करता है।

नवरात्र का पर्व शक्ति की आराधना, सकारात्मकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक और सामुदायिक संबंधों को भी मजबूती मिलती है। सहसपुर में पंचमी के अवसर पर आयोजित पूजा-अर्चना और ग्राम भ्रमण ने इस परंपरा की निरंतरता को रेखांकित किया।

इस प्रकार सहसपुर में शारदीय नवरात्र की पंचमी का आयोजन धार्मिक श्रद्धा, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामूहिक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। राजपरिवार की इस परंपरा ने एक बार फिर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय लोगों के बीच आपसी जुड़ाव की झलक प्रस्तुत की।