दिल्ली पुलिस ने 12 घंटे बाद AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को किया रिहा, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की आज SEM कोर्ट में पेशी
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में ली गईं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को करीब 12 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शांति भंग की आशंका से जुड़े नए मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्हें नई दिल्ली की SEM कोर्ट में पेश किया जाना है, जहां आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली। राजधानी दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में ली गईं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने करीब 12 घंटे बाद रिहा कर दिया। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी और उन्हें अदालत में पेश किए जाने की खबर से मामला चर्चा में है। दोनों घटनाओं को लेकर छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम मंडी हाउस से जंतर-मंतर की ओर आयोजित तिरंगा मार्च में शामिल होने के बाद नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। छात्र संगठन के सदस्यों ने दावा किया था कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इस दौरान संगठन की ओर से उनकी स्थिति और ठिकाने को लेकर चिंता जताई गई थी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नेहा बोरा को निवारक प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, उन्हें आरके पुरम थाने से छोड़ा गया। लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रहने के बाद उनकी रिहाई हुई।
दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शांति भंग करने की आशंका से जुड़े एक नए मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत की गई। उन्हें नई दिल्ली की एसईएम (सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) अदालत में पेश किया जाना है। अदालत में पेशी के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया और हिरासत अथवा जमानत से संबंधित निर्णय स्पष्ट होगा।
इस घटनाक्रम पर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया दी गई है। संगठन ने सवाल उठाया है कि सरकार युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों कर रही है। संगठन का कहना है कि युवा भी देश के समान अधिकार वाले नागरिक हैं और उन्हें संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों एवं कानूनी संरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। संगठन ने हिरासत और गिरफ्तारी से जुड़े घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है।
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले हुई हिरासत और उसके बाद की कार्रवाई ने नागरिक अधिकारों, विरोध-प्रदर्शन तथा पुलिस की निवारक कार्रवाई को लेकर बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के दावों के बीच पूरी स्थिति समझने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों तथा न्यायिक प्रक्रिया से सामने आने वाले तथ्यों को देखना जरूरी है।
फिलहाल, नेहा बोरा की रिहाई हो चुकी है, जबकि अभिजीत दीपके की अदालत में पेशी पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। मामले में अदालत के निर्णय और पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली अतिरिक्त जानकारी के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।