रायपुर में ₹296.85 लाख के सड़क डामरीकरण पर उठे सवाल, मनोज सिंह ठाकुर ने ड्रेनेज घोटाले का आरोप लगाकर सांसद, विधायक और महापौर से मांगा जवाब

रायपुर के वामनराव लाखे वार्ड क्रमांक 66 में कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर 296.85 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित डामरीकरण कार्य को लेकर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी ड्रेनेज परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, जलभराव और सड़क चौड़ीकरण की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी और महापौर मीनल चौबे से जवाब मांगा है। साथ ही उच्चस्तरीय जांच और स्थायी समाधान की मांग की है।

Nov 1, 2026 - 09:39
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रायपुर में ₹296.85 लाख के सड़क डामरीकरण पर उठे सवाल, मनोज सिंह ठाकुर ने ड्रेनेज घोटाले का आरोप लगाकर सांसद, विधायक और महापौर से मांगा जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायुपर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित ड्रेनेज सिस्टम और सड़क निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वामनराव लाखे वार्ड क्रमांक 66 के अंतर्गत कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर 296.85 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे डामरीकरण कार्य को लेकर अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने क्षेत्र में जलभराव, संकरी सड़कों और यातायात जाम की समस्याओं का स्थायी समाधान किए बिना डामरीकरण कराने को सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े करने वाला कदम बताया है।

मनोज सिंह ठाकुर ने जारी बयान में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी और महापौर मीनल चौबे से सवाल किया कि करोड़ों रुपये की लागत वाले सड़क निर्माण कार्य के भूमिपूजन के दौरान क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की वास्तविक समस्याओं का समाधान किए बिना केवल डामरीकरण कराना जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है।

ठाकुर ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत कुशालपुर और संतोषी नगर क्षेत्र में बनाए गए ड्रेनेज सिस्टम पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जलभराव रोकने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद बारिश के दौरान कुशालपुर और प्रोफेसर कॉलोनी के कई हिस्सों में पानी भरने की समस्या बनी रहती है। उन्होंने ड्रेनेज निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यदि सड़क के आसपास जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होगी, तो नए डामरीकरण की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में संबंधित विभागों को पहले जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी समीक्षा करनी चाहिए और उसके बाद सड़क निर्माण का कार्य आगे बढ़ाना चाहिए।

सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा उठाते हुए ठाकुर ने बताया कि गोपिया पारा से मां दंतेश्वरी मंदिर, संतोषी चौक और तिरंगा चौक होते हुए रिंग रोड चौक तक का मार्ग कई स्थानों पर संकरा है। उनके अनुसार, इस मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। इससे स्कूली बच्चों, एंबुलेंस, स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सड़क की चौड़ाई ही पर्याप्त नहीं है, तो केवल डामरीकरण से यातायात व्यवस्था में कितना सुधार होगा। ठाकुर ने प्रशासन से सड़क की चौड़ाई, यातायात दबाव और जल निकासी व्यवस्था का समग्र सर्वेक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण की योजना बनाते समय भविष्य की यातायात जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की कि कुशालपुर और संतोषी नगर में स्मार्ट सिटी ड्रेनेज परियोजना के तहत हुए कार्यों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही सड़क चौड़ीकरण की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए और जलभराव का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के बाद ही डामरीकरण कार्य को अंतिम रूप दिया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो स्थानीय नागरिकों के साथ जन-आंदोलन किया जा सकता है।

हालांकि, ड्रेनेज परियोजना में भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, महापौर मीनल चौबे और संबंधित विभागों का पक्ष प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराया गया है।

फिलहाल यह मामला सड़क निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और यातायात सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दा बनकर सामने आया है।