राहुल गांधी पहले शिवतत्त्व समझें, सनातन संस्कृति और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के अपमान पर कांग्रेस मांगे माफी: पुरन्दर मिश्रा
रायपुर में भाजपा विधायक पुरन्दर मिश्रा ने राहुल गांधी के रामलीला मैदान में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का तांडव गहन आध्यात्मिक दर्शन है, इसे राजनीतिक अराजकता से जोड़ना उचित नहीं है। मिश्रा ने कांग्रेस पर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रमों के बहिष्कार का आरोप लगाते हुए प्रदेशवासियों से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। उन्होंने रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों की भीड़ के दावे पर भी सवाल उठाए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में राहुल गांधी के रामलीला मैदान में दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक पुरन्दर मिश्रा ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पहले भगवान शिव के शिवतत्त्व और सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक दर्शन को समझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेता बार-बार सनातन संस्कृति तथा छत्तीसगढ़ की अस्मिता को आहत कर रहे हैं। मिश्रा ने इस पूरे मामले में कांग्रेस से देश और प्रदेश की जनता से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
दो नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की बारात समरसता, सद्भाव और सामाजिक एकात्मता का प्रतीक है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी का भाव निहित है। उन्होंने कहा कि शिवजी की बारात में शामिल होने पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन भगवान शिव के तांडव को राजनीतिक अराजकता से जोड़ने की मानसिकता का समर्थन नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, तांडव सनातन धर्म का गहन आध्यात्मिक दर्शन है, इसे राजनीतिक नारे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मिश्रा ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक नवंबर को आयोजित राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रमों का बहिष्कार कर कांग्रेस नेताओं ने छत्तीसगढ़ महतारी और प्रदेश के तीन करोड़ नागरिकों की भावनाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का स्थापना दिवस प्रदेश की पहचान, गौरव और अस्मिता से जुड़ा अवसर है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर राजनीतिक विरोध के नाम पर कार्यक्रमों से दूरी बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से प्रदेशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
अपने बयान में पुरन्दर मिश्रा ने 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस से उस घटना की जिम्मेदारी और तत्कालीन नेताओं की भूमिका को लेकर जवाब देने की मांग की। मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इतिहास की घटनाओं पर राजनीति करती है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस जैसे अवसरों पर अलग रुख अपनाती है।
रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली में 10 लाख लोगों की भीड़ होने के दावे पर भी मिश्रा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैदान की क्षमता लगभग 45 हजार बताई जाती है और इसका एक बड़ा हिस्सा मंच तथा अन्य व्यवस्थाओं में उपयोग होता है। ऐसे में कांग्रेस को अपने भीड़ संबंधी दावों की वास्तविकता स्पष्ट करनी चाहिए। यह संख्या और क्षमता से संबंधित आंकड़े पुरन्दर मिश्रा के बयान में दिए गए हैं।
मिश्रा ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और वर्तमान भूमिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस देश के ज्वलंत मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक टकराव और भ्रम का माहौल बना रही है।
उन्होंने कहा कि देश को अराजकता नहीं, बल्कि एकता की आवश्यकता है। सनातन संस्कृति, सिख समाज के सम्मान और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान भाजपा विधायक की ओर से जारी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।