पांढुर्णा में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को लेकर विवाद, हड़ताल पर स्व-सहायता समूह और रसोइया

पांढुर्णा जिले में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइयों की हड़ताल के बीच जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश कपाले ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल के कारण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित हुई है। वहीं स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार हड़ताल की प्रमुख मांगों में लंबित भुगतान, रसोइयों की बकाया राशि, THR में खाद्यान्न की मात्रा और नियमित भुगतान शामिल हैं।

Sep 21, 2026 - 16:02
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पांढुर्णा में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को लेकर विवाद, हड़ताल पर स्व-सहायता समूह और रसोइया

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l पांढुर्णा जिले में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइयों की हड़ताल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश कपाले ने हड़ताल के कारण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को भोजन मिलने में परेशानी का दावा करते हुए सरकार से संबंधित मांगों के तत्काल निराकरण की मांग की है। उन्होंने इसे महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइयों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से जोड़ते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पांढुर्णा जिले में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह और रसोइया संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर 16 सितंबर से हड़ताल शुरू की थी। संगठन की ओर से बताया गया कि मध्यान्ह भोजन और आंगनवाड़ी से जुड़े भुगतान लंबित हैं। इसके अलावा रसोइयों की जून 2024, जून 2025 और जून 2026 की 15-15 दिन की लंबित राशि जारी करने, टेक होम राशन यानी THR में निर्धारित मात्रा में गेहूं-चावल उपलब्ध कराने और मध्यान्ह भोजन तथा रसोइयों की राशि का नियमित भुगतान करने की मांग भी रखी गई है।

हड़ताल के दौरान महिला समूहों और रसोइयों की ओर से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। संगठन का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण मध्यान्ह भोजन संचालन से जुड़े लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने शासन-प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।

कांग्रेस नेता सुरेश कपाले ने अपने बयान में आरोप लगाया कि हड़ताल का असर जिले के बच्चों के भोजन पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और परोसने का काम करती हैं, उनकी मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया। कपाले ने सरकार से बातचीत कर समस्या का समाधान करने की मांग की और कहा कि यदि मांगों का जल्द निराकरण नहीं हुआ तो कांग्रेस आंदोलनरत महिलाओं के समर्थन में सड़क पर उतर सकती है।

कपाले ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला श्रमिकों के श्रम और उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने मध्यान्ह भोजन व्यवस्था के प्रभावित होने को लेकर सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, सरकार या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

मध्यान्ह भोजन योजना में स्व-सहायता समूहों और रसोइयों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश सरकार के दस्तावेजों में भी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के संचालन से जुड़े स्व-सहायता समूहों के संबंध में प्रावधान और भुगतान व्यवस्था का उल्लेख मिलता है।

फिलहाल पांढुर्णा में विवाद का मुख्य केंद्र हड़ताल से जुड़ी मांगें और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर उसका असर है। संगठन लंबित भुगतान और अन्य मांगों के समाधान की मांग कर रहा है, जबकि कांग्रेस ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ राजनीतिक रूप से उठाया है। प्रशासन की ओर से मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और हड़ताल कब तक जारी रहती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।